आपने आज तक कथा और पुराणों में नाग लोक का नाम और उसके बारे में कई कहानियां सुनी होंगी, लेकिन एमपी में भी एक नागलोक है जहां लोग रोज पूजा-पाठ करने जाते हैं

आपने आज तक कथा और पुराणों में नाग लोक का नाम और उसके बारे में कई कहानियां सुनी होंगी, लेकिन एमपी में भी एक नागलोक है जहां लोग रोज पूजा-पाठ करने जाते हैं

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आपने आज तक कथा और पुराणों में नाग लोक का नाम और उसके बारे में कई कहानियां सुनी होंगी, लेकिन एमपी में भी एक नागलोक है जहां लोग रोज पूजा-पाठ करने जाते हैं. इस नाग लोक में आधे दर्जन से ज्यादा नाग मौजूद हैं, लेकिन वो कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते और दिन में दो बार तय समय पर सभी को दर्शन देकर वापस चले जाते हैं

दरअसल, डिंडौरी जिले के मेहदवानी विकास खंड के भुरका गांव की पहाड़ी में गांव का ही एक युवक जब शौचालय आया था तब उसे नाग नागिन के झुण्ड को देखा. उसने गांव के लोगों को इस घटना की जानकारी दी.

दरअसल, डिंडौरी जिले के मेहदवानी विकास खंड के भुरका गांव की पहाड़ी में गांव का ही एक युवक जब शौचालय आया था तब उसे नाग नागिन के झुण्ड को देखा. उसने गांव के लोगों को इस घटना की जानकारी दी.

जब ग्रमीणों ने युवक की बात सुन पहाड़ी आकर देखा तो सब हैरान हो गए. वहां सांप का जोड़ा नहीं बल्कि एक साथ सात से आठ नाग मौजूद थे. इतने नागों को एक साथ देख उन्हें देख देवी देवता का रूप मान कर वहां भजन कीर्तन शुरू कर दिए गए. ये बात आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल गई.

जब ग्रमीणों ने युवक की बात सुन पहाड़ी आकर देखा तो सब हैरान हो गए. वहां सांप का जोड़ा नहीं बल्कि एक साथ सात से आठ नाग मौजूद थे. इतने नागों को एक साथ देख उन्हें देख देवी देवता का रूप मान कर वहां भजन कीर्तन शुरू कर दिए गए. ये बात आग की तरह आसपास के गांवों में भी फैल गई.

इन नागों का अपने बिलों से निकलने का समय भी निर्धारित है. ग्रामीणों की माने तो सभी नाग सुबह और शाम ही निकलते हैं और दर्शन देकर वापस अपने बिलों में चले जाते हैं जो अपने आप में आश्चर्य की बात है. ये नाग किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

इन नागों का अपने बिलों से निकलने का समय भी निर्धारित है. ग्रामीणों की माने तो सभी नाग सुबह और शाम ही निकलते हैं और दर्शन देकर वापस अपने बिलों में चले जाते हैं जो अपने आप में आश्चर्य की बात है. ये नाग किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

नागों के रंगो में अलग-अलग बदलाव को भी ग्रामीण किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मान रहे. गांव का जतन सिंह नाम का पंडा भी नागों के बिल के पास बैठ कर मंत्र उच्चारण करता है. ग्रामीणों की मानें तो तय समय के साथ ही पंडा के मंत्र उच्चारण और आवाहन करने पर भी नाग दर्शन देते हैं और फिर वापस बिल में चले जाते हैं.

नागों के रंगो में अलग-अलग बदलाव को भी ग्रामीण किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मान रहे. गांव का जतन सिंह नाम का पंडा भी नागों के बिल के पास बैठ कर मंत्र उच्चारण करता है. ग्रामीणों की मानें तो तय समय के साथ ही पंडा के मंत्र उच्चारण और आवाहन करने पर भी नाग दर्शन देते हैं और फिर वापस बिल में चले जाते हैं.

 इतने सारे नागों की मौजूदगी के लिए भी ग्रामीणों के अपने ही तर्क हैं. उनका मानना है कि इस पहाड़ी में कुछ खास रहस्य दबा है जिसके चलते इतने नाग देवता यहां है.

इतने सारे नागों की मौजूदगी के लिए भी ग्रामीणों के अपने ही तर्क हैं. उनका मानना है कि इस पहाड़ी में कुछ खास रहस्य दबा है जिसके चलते इतने नाग देवता यहां है.

ग्रामीण अब इस पहाड़ी को नागलोक का नाम देने की बात कह रहे हैं. साथ ही इस स्थान पर भोलेनाथ की शिवलिंग की स्थापना कर यहां मंदिर आदि भी बनवाया जाएगा.

ग्रामीण अब इस पहाड़ी को नागलोक का नाम देने की बात कह रहे हैं. साथ ही इस स्थान पर भोलेनाथ की शिवलिंग की स्थापना कर यहां मंदिर आदि भी बनवाया जाएगा.

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