Gorakhpur Cm Yogi Latest Hindi News |जी हाँ......बिना AC कमरे में तख्त पर सोयेंगे CM योगी

जी हाँ......बिना AC कमरे में तख्त पर सोयेंगे CM योगीGorakhpur Cm Yogi Latest Hindi News Bharat Ka Ujala

गोरखपुर : UP के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी गोरखनाथ मंदिर की तरह ही लखनऊ स्थित आवास में भी बिना एयरकंडीशनर वाले कमरे में तख्त पर ही सोयेंगे। गोरक्षपीठ प्रबंधन से जुडे लोगों ने आज यहां बताया कि महंत योगी आदित्यनाथ अपने सादगी के लिए जाने जाते हैं और वह गोरखनाथ मंदिर में बिना एसी चलाये सोते थे। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं होगा और लखनऊ में स्थित आवास पर अब मुख्यमंत्री बिना एसी चलाये कमरे में तख्त पर ही सोयेंगे। गौरतलब है कि पिछले चार दिनों से लखनऊ के पांच कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास में उनके रहने की तैयारियां चल रही हैं। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से जुडे कई अन्य सामान गोरखनाथ मंदिर से भेजे जा रहे हैं। चार से पांच घंटे ही नींद लेने वाले योगी आदित्यनाथ बाकी समय में अपने काम में जुटे रहना पसंद करते हैं। वे सुबह से लेकर रात तक देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहते हैं और तडके सुबह उठने की उनकी पुरानी आदत है। योग, व्यायाम और चहलकदमी जैसी क्रिया भी उनकी दिनचर्या में शामिल है।मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी गोरखनाथ मंदिर वाली व्यवस्था अपने सरकारी आवास में भी करा रहे हैं। गोरक्षपीठ से तीन दिन पहले मंदिर से लखनऊ गये पुरोहितों ने मुख्यमंत्री आवास में पूजा पाठ करने के बाद कलश स्थापित किया था।गोरखनाथ मंदिर में स्थित गो सेवा में मुख्य रूप से लगे मोहम्मद मान और सुरेन्द्र ने आज बताया कि गोरक्षपीठाधीश्वर अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये है । आदित्यनाथ धार्मिक और एवं राजनीतिक कार्यों में व्यस्तता के बावजूद गो सेवा पर भी भरपूर ध्यान देते हैं इसलिए गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में पल रही कुछ गायों कोे अब मुख्यमंत्री अपने पास लखनऊ भी ले जा सकते हैं। हालांकि गायों को यहां से ले जाने का निर्णय मुख्यमंत्री आदित्यनाथ करेंगे कि कौन सी गायें लखनऊ जानी हैं। उन्होंने बताया कि योगी भोर में उठने के बाद पहले की तरह पूजा पाठ कर गो सेवा करते हैं। गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित गोशाला में प्रतिदिन सेवा करना और गायों बछडों को दाना खिलाना योगी आदित्यनाथ के दिनचर्या का हिस्सा है। लंबे समय से वे गोशाला में रह रही गायों से इतना घुल मिल गये कि वे उनकी आहट पहचान लेती हैं। वह वहां बछडे बछिया के साथ भी समय देते हैं उन्हें सहलाते एवं दुलराते हैं।

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