लखनऊ: विधान परिषद सदस्य को धमकी देने वाले अधिकारी को सजा

लखनऊ: विधान परिषद सदस्य को धमकी देने वाले अधिकारी को सजाविधान परिषद सदस्य को धमकी देने वाले अधिकारी को सजा

लखनऊ : विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने सदन में कांग्रेस दल के नेता दिनेश प्रताप सिंह का एक अधिशासी अभियंता द्वारा टेलीफोन पर धमकी एवं अपमानजनक शब्दों के जरिये विशेषाधिकार हनन किये जाने के मामले में उसे सजा सुनाते हुए उसका तबादला करने तथा सदन द्वारा की गयी उसकी भर्त्सना को उसकी सेवा पंजिका में दर्ज करने के आदेश दिये हैं। सभापति ने सोमवार अपराह्न 12 बजे रायबरेली विकास प्राधिकरण के आरोपी अधिशासी अभियंता एस.के. सिन्हा को पेश किये जाने के बाद हुई जिरह तथा अधिकारी द्वारा बिना शर्त माफी मांगे जाने के उपरान्त अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। देर शाम करीब साढ़े सात बजे सभापति यादव ने दोषी माने गये अधिकारी सिन्हा को कहीं और स्थानान्तरित करने तथा सदन द्वारा की गयी उसकी भर्त्सना को उसकी सेवा पंजिका में दर्ज करने के आदेश दिये। मालूम हो कि गत 18 मई को परिषद में कांग्रेस दल के नेता दिनेश प्रताप सिंह को टेलीफोन पर धमकी देने के आरोपी अधिशासी अभियंता सिन्हा को सदन में पेश होने के आदेश दिये गये थे। गत 18 मई को कांग्रेस दल के नेता दिनेश प्रताप सिंह ने विशेषाधिकार हनन का मामला उठाते हुए 17 मई को रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता एस.के. सिन्हा पर फोन पर अभद्रता करने और विधायकी भुलाने जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने का आरोप लगाया था। इस पर सभापति ने आरोपी अधिकारी को 22 मई को सदन में हाजिर करने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में सोमवार दोपहर 12 बजे विधान परिषद एक अदालत में तब्दील हो गयी थी और मार्शल ने रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता एस.के. सिन्हा को अस्थायी कठघरे में खड़ा किया। शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा ने सिन्हा से जिरह करते हुए कांग्रेस सदस्य दिनेश प्रताप सिंह के आरोपों को दोहराया था। इस पर सिन्हा ने जवाब दिया कि उन्होंने जानबूझकर ऐसी कोई बात नहीं कही है। अगर इससे किसी को ठेस लगी है तो वह पूरे सदन से बिना शर्त माफी मांगते हैं। सिन्हा ने दिनेश से विधायकी भुला दूंगा जैसी बात कहने के आरोप से इनकार किया। स्पष्टीकरण के बाद उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया। नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन समेत विभिन्न दलों तथा निर्दल समूह के कई सदस्यों ने आरोपी अधिकारी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। इस पर सभापति रमेश यादव ने निर्णय सुरक्षित रखते हुए कहा कि सभी दलों के नेताओं से बात कर इस मामले पर सजा का फैसला किया जाएगा।

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