महोबा: दो सौ फीट गहरी खाईं में ट्रैक्टर पलटा, चालक की मौत

2017-02-02 09:30:33.0

महोबा: दो सौ फीट गहरी खाईं में ट्रैक्टर पलटा, चालक की मौतदो सौ फीट गहरी खाईं में ट्रैक्टर पलटा, चालक की मौत

महोबा : पत्थर मंडी कबरई में गुरुवार को एक और श्रमिक अवैध खनन की भेंट चढ़ गया। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किए जा रहे खनन से 200 फीट से ज्यादा गहरे हो चुके रमकुंडा पहाड़ में पत्थर ढो रहा एक ट्रैक्टर नीचे जाते समय संतुलन खोकर खाई में पलट गया जिसके चलते चालक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना से पत्थर मंडी सनसनी फैल गई। चालक की मौत से परिजनों में कोहराम मचा गया। वहीं खनन माफिया ले देकर मामले को रफा-दफा करने में लगे हैं। कबरई के झलकारीबाई नगर का निवासी रामस्वरुप पुत्र गरीबा यादव पहाड़ से पत्थर ढोकर अपने परिवार का गुजारा करता था। गुरुवार को वह रोज की तरह ट्रैक्टर से 200 फीट से ज्यादा गहरे हो चुके इस पहाड़ में पत्थर लोड करने जा रहा था। तभी बेहद तंग व ढालू रास्ते में उसका संतुलन बिगड़ गया। ट्रैक्टर पलट कर चालक समेत गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में चालक रामस्वरुप की दर्दनाक मौत हो गई। घटना होते ही वहां काम कर रहे श्रमिकों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया है। वहीं पहाड़ में खनन कराने वाले माफिया ले देकर मामला रफा-दफा करने में जुट गए हैं। पत्थर मंडी में दो दर्जन से अधिक घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। कभी अनियमित ब्लास्टिंग तो कभी गहरे पहाड़ में गिरकर मरने के मामले आए दिन सुर्खियों में रहते हैं। श्रमिकों की मौत होने पर उनके परिजनों को डेढ दो लाख रूपए थमाकर सौदा करना यहां का रिवाज बन चुका है। दरअसल पत्थर व्यापारी खान सुरक्षा के मानकों को ताक में रख काम करते हैं। इस विभाग का जिला या मंडल स्तर पर कोई कार्यालय नहीं है। ग्वालियर से कभी कभार आने वाले विभाग के अधिकारी खनन कराने वालों से सांठगांठ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। यही कारण है कि अनियमित खनन के कारण पहाड़ 200 फिट से अधिक गहरा हो चुका है। खान विभाग की जिम्मेदारी केवल अवैध खनन को रोकने की है। पर खान में सुरक्षा से जुड़े इस मामले में खान विभाग कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। इसी तरह पहाडों में अवैध व अनियमित विस्फोट रोकने की जिम्मेदारी कंट्रोलर एक्सप्लोसिव आगरा की होती है। वह भी अपनी जिम्मेदारी को खान में सुरक्षा को लेकर तैनात अधिकारियों की तरह ही अंजाम देता है। यही कारण है कि यहां होने वाली दुर्घटनाओं में श्रमिकों की मौत का सिलसिला रूक नहीं रहा है।

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