Muzaffarnagar News| मुजफ्फरनगर: 'खतौली रेल हादसा रेलकर्मियों ने ही काटी थी पटरी

Muzaffarnagar News| मुजफ्फरनगर: खतौली रेल हादसा रेलकर्मियों ने ही काटी थी पटरीमुजफ्फरनगर: ’खतौली रेल हादसा रेलकर्मियों ने ही काटी थी पटरी

खतौली हादसे की जानकारी मिलते ही भाग निकले थे कर्मचारी ट्रैक जोड़ने से पहले ही आ गई ट्रेन गेटमैन की रिकॉर्डिंग में स्पष्ट हुई लापरवाही
मुजफ्फरनगर : जनपद के खतौली में शनिवार शाम बड़ा रेल हादसा हुआ। ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे के बाद शुरुआती जांच में सिस्टम की घोर लापरवाही सामने आ रही है। इस बीच हादसे से जुड़ा एक ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो क्लिप में घटनास्थल से कुछ दूरी पर तैनात गेटमैन और एक रेलवे कर्मचारी के बीच बातचीत की गई है।गेटमैन बता रहा है कि पटरी पहले से टूटी पड़ी थी। मगर, उस पर सही से काम नहीं किया जा रहा था। वो बता रहा है कि जो पटरी काटी गई थी, उसे जोड़ा नहीं गया और ऐसे ही छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, वहां काम करने वाले कर्मचारी अपने मशीन भी वहीं छोड़कर चले गए। गेटमैन बता रहा है कि पटरी जोड़ी नहीं गई थी और ट्रेन के आने का वक्त हो गया। ऐसे में सुरक्षा के लिए न कोई सिग्नल दिया गया और न ही लाल झंडा लगाया गया। गेटमैन बातचीत में आगे बता रहा है कि पटरी पर काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। उसका आरोप है कि कर्मचारी साइट पर आते हैं और बैठे रहते हैं। इतना ही नहीं इस शख्स का ये भी कहना है कि हाल ही में यहां नए जेई की नियुक्ति हुई है और पुराने कर्मचारी उनकी बात नहीं मानते हैं और मनमानी करते हैं। ये भी कहा गया है कि हादसे के बाद तुरंत ड्यूटी पर तैनात गैंगमैन, लोहार और जेई भाग गए और जेई ने अपना फोन बंद कर लिया। यानी जो लापरवाही की बात शुरुआती जांच में सामने आ रही थी, गेटमैन के इस ऑडियो क्लिप ने उसे और पुख्ता कर दिया है। हालांकि, इस ऑडियो क्लिप की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन इतना साफ हो गया है कि हादसे की जांच कर रहे अधिकारी भले ही अभी किसी नतीजे तक न पहुंच पाए हों, मगर ये ऑडियो रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही की गवाही दे रहा है। बता दें कि जिस पटरी से कलिंग-उत्कल ट्रेन को गुजरना था, उस पर काम चल रहा था। ट्रेन को धीमी गति से गुजारने के आदेश थे, लेकिन सिग्नल गड़बड़ होने से ड्राइवर को सूचना नहीं मिली और ट्रेन 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चलती रही, जिस वजह से पटरी उखड़ गई। पटरी से ज्यादातर ट्रेन के बीच के डिब्बे उतरे। इंजन और पहले 2 डिब्बे निकल चुके थे। इस दौरान ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक भी नहीं लगा सका, क्योंकि पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक होता है। आगे और पीछे के डिब्बे नहीं पलटे, बीच के डिब्बे पलटे हैं। वहां जो काम कर रहे थे बाद में वो भी भाग गए। 'पटरी पर मौत मिली-पोस्टमॉर्टम हाउस में बेइंतजामी, परिजनों में गुस्सा' खतौली में हुए ट्रेन हादसे ने 23 लोगों की जान ले ली है। जबकि इस भीषण दुर्घटना में 150 से ज्यादा लोग जख्मी बताए जा रहे हैं। इस एक्सीडेंट में एक तरफ जहां रेलवे की लापरवाही सामने आ रही है, वहीं स्थानीय प्रशासन की हैरान करने वाली बेदर्दी भी देखने को मिली है। ट्रेन के डिब्बे पलटने से उसमें बैठे कई यात्रियों की मौत हुई। देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए शवों को डिब्बों से बाहर निकाला गया। इसके बाद शवों को मुजफ्फरनगर में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मगर, पोस्टमॉर्टम हाउस से जो तस्वीर सामने आई है, वो बेहद शर्मनाक तो ही, साथ ही डरावनी भी है. पोस्टमॉर्टम हाउस में शवों को नीचे फर्श पर इस तरीके से डाला गया है, जैसे कोई ढेर लगा दिया गया हो। पोस्टमॉर्टम हाउस में फर्श पर दर्जनभर लोगों के शव पड़े हुए हैं। शव खून से लथपथ हैं। चारों तरफ बर्फ की सिल्लियां रखी गई हैं। यानी मेडिकल प्रशासन के पास शवों को सही ढंग से रखने तक की जगह नहीं है। यहां तक कि शवों पर ढकने के लिए उनके पास एक सफेद चादर तक नहीं थी। एक कोने में दर्जनभर बर्फ की सिल्लियां रखी हुई थीं जिसपर लाकर लाशों को पटका जा रहा था। महिला हों या पुरुष, बुजुर्ग हों या युवा जबकी लाशों को ढेर में तब्दील कर दिया गया था। कई परिजन जब अपनों की तलाश में पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे तो लाशों की हालत देखकर हैरान रह गए। उनका कहना था कि पहले हादसे ने उनके अभागे रिश्तेदारों की जान ले ली और अब प्रशासन उनके शवों के साथ इस दर्जे की संवेदनहीनता बरत रहा है। बता दें कि ये हादसा शनिवार शाम 5 बजकर 46 मिनट पर हुआ। ट्रेन संख्या 18477 कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस पुरी से हरिद्वार की तरफ जा रही थी। इसी दौरान मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। पटरी से उतरे डिब्बे ट्रैक के पास बने मकानों और स्कूल इमारत में घुस गए।

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