सहारनपुर भुखमरी की कगार पर सहकारी समितियों के कर्मचारी |breaking news in hindi today's live saharanpur city

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सहारनपुर : उत्तर प्रदेश का अन्न दाता किसान जिन सहकारी समितियों को अपने घर का बैंक मानते हैं, उन्ही सहकारी साघन समितियों के हजारों कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का संकट बना हुआ है। कारण है सहकारी समितियों के कर्मचारियों को पीछले कई माह से वेतन न मिलना।उत्तर प्रदेश का तमाम छोटे बडे किसान सहकारी साघन समितियों से अपनी प्रत्येक फसल को उगाने के लिए आवश्यकता अनुसार उर्वरक, कीट नाशक दवाईयां, जींक, पोटाश एंव डाई समेत कई अन्य प्रकार की खाद आदि की जरूरतों पुरी करतें हैं। यही वजह है कि किसान इन समितियों को अपना घर का बैंक मानते हैं। परन्तु पिछले कुछ समय से इन साघन सहकारी समितियों की स्थिति लड खडाई हुई है। क्योकि कर्ज लेने वाले किसान ऋण की धनराशि समितियों में जमा नही करा रहें हैं। ऋण जमा न कराने के पीछे चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी समेत ज्यादातर सियासी दलों ने किसानों को कर्ज माफी की लोलीपोप दी। कर्ज माफी का सबसे बडा आश्वासन भाजपा की ओर से दिया गया था। इसी के चलते किसानों ने गांव-देहात के प्रत्येक मतदान केंद्र पर भाजपा के पक्ष में झमाझम वोटो की बारीश की। अब किसान अपने कर्ज माफी की बाट जोह रहा है। और इसी चक्कर किसान अपने सरकारी कर्जे को अदा करने मे आना कानी कर रहा है। सरकार एंव किसानों के इस फेर में राज्य की साघन सहकारी समितियों के हजारों कर्मचारी एंव उनके परिवार वेतन न मिलने की वजह से भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं। जनपद मे लगभग 101 साधन सहकारी समितियां है। विभागीय सूत्रो के मुताबिक प्रत्येक समिति पर 1 सचिव, 2 आंकिक, 1 सहायक एंव 1 चौकीदार की नियुक्ति रहती है। कर्मचारियों के इस औसत के हिसाब से अकेले जनपद सहारनपुर में ही 505 कर्मचारी कार्यरत हैं। समितियों से जुडे पुख्ता सूत्रों के अनुसार 2016 के जौलाई माह से लेकर अभी सहकारी समितियों के कर्मचारियों को वेतन नही मिला है। इसकी वजह से कई कर्मचारी डयूटी की बजाय दुसरी मेहनत मजदूरी कर अपने परिजनों का पेट पाल रहें हैं। साघन सहकारी समितियों के कर्मचारियों यह दशा केवल सहारनपुर ही नही बल्कि पुरे उत्तर प्रदेश में बनी हुई हैं। ऐसे में देखना यह है कि प्रदेश की योगी सरकार कब तक किसानों के घर के बैंक के कर्मचारियों को आर्थिक संकट से उभारेंगे।

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