सहारनपुर नगर निगम से लायसेंस लिये बगैर ही कुत्तों को पाल रहे है शौकीन, निगम से मेरे कार्यकाल में नही बना कोई भी कुत्ता पालन का लाईसेंस: नगरायुक्त

सहारनपुर नगर निगम से लायसेंस लिये बगैर ही कुत्तों को पाल रहे है शौकीन, निगम से मेरे कार्यकाल में नही बना कोई भी कुत्ता पालन का लाईसेंस: नगरायुक्तsaharanpur city latest news update bharat ka ujala

सहारनपुर : नगर निगम के आलाधिकारी एक ओर महानगर को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद में जुटे हैं, वहीं दुसरी तरफ यहां की सडकों एंव गली-मौहल्लो में आवारा कुत्तों के रूप मौत घुम रही है। जिसका ईलाज आज तक भी निगम प्रशासन करने में पुरी तरह से विफल है। महानगर के साथ-साथ ग्रामाणी क्षेत्रों में भी आवारा कुत्तों का न केवल आतंक बना हुआ है, बल्कि यह खुुुुुंखार कुत्ते अभी तक दर्जनों लोगों को नौंच कर मौत के मौत के घाट ऊतार चुके हैं। इन आदम खोर कुत्तों पर न तो नगर निगम ही अकुंश लगा पा रहा है, ओर न ही जिला प्रशासन।महानगर में आवारा कुत्तों की दहशत के कारण अभिभावको ने अपने छोटे बच्चों को अकेले सडकों पर भेजना बन्द कर दिया है। इतना ही नही स्कुल में भेजने एंव लाने के लिए भी अब मां-बाप अपने बच्चों के लिए खुद ही समय निकाल रहें हैं। नगर निगम क्षेत्र में कुत्तो के पालने लिए अलग से नियम निर्धारित हैं। यह नियम केवल कुत्तों के पालन के लिए ही नही बने, बल्कि निगम क्षेत्र में गाय, बकरी, भेड, भैंसा एंव घोडा पालन समेत सभी प्रकार के पशुओं को पालने के लिए निगम प्रशासन से इन पशुओ का पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। परन्तु हैरत अंगेज बात यह है कि जिनल लोगो ने बेहद कीमती कुत्ते अपने घरों मे पाल रखें हैं, उनमें से अधिकांश लोगो के पास इनके पालन का निगम द्वारा निर्गत अधिकार पत्र नही है। हमारे संवाददाता दिनेश मौर्य ने इस संदर्भ में जब नगर निगम के आयुक्त डॉ. ओ.पी.वर्मा से वार्ता की तो उन्होने कहा कि मेरे कार्यकाल में तो किसी भी व्यक्ति ने कुत्ता पालन के लिए निगम से अनुज्ञप्ति-पत्र के लिए आवेदन नही किया है। जिससे स्पष्ट होता है कि न तो निगम प्रशासन अपने कायदे कानूनोे के पालन कराने के प्रति सचेत है और न ही इन नियमों के बारे में महानगर के लोग जानते हैं। इतना ही नही निगम क्षेत्र में अभी भी ज्यादातर भैंस पालन की दुग्ध की डेयरीयां सिर्फ नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के कारकुनों के सहमो करम पर चल रहीं हैं। क्योकि निगम के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ऐसे डेयरी संचालकों से प्रति माह अपना नजराना वसूल लेते हैं। इसके साथ ही जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सुनील यादव ने बताया कि जिला पंचायत क्षेत्र में पशु पालन अथवा कुत्ता पालन के लिए किसी को जिला पंचायत से अनुमति लेने की आवश्यकता नही होती हैं। इसके विपरित जिला पंचायत का अमला ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित विभिन्न लघु उद्योगो पर विभिन्न पर लाईसेंश थोप कर उनसे कर वसूली करने से नही चुकता है। इस सबके चलते मौजूदा समय में जिस प्रकार से नगर निगम एंव जिला पंचायत प्रशासन जिस प्रकार से आवारा कुत्तों के मामले को लेकर पल्ला झाड रहें हैं। उसके चलते ही आये दिन आवारा कुत्ते न केवल छोटे-छोटे बच्चों, बल्कि बडे बुजूर्गो को सरे राह नौंच रहे हैं। वह एक गम्भीर समस्या बनती जा रही है।पशु पालन विभाग के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि गर्मी के मौसम में कुत्ते सर्दियों के अपेक्षा अधिक खुंखार हो जाते हैं, ऐसा इस लिए होता है कि आवारा कुत्ते शाक-भाजी खाने की बजाय ज्यादातर मृत पशुओं का मांस खाते हैं। ऐसे में मासं की तासीर भी भी गर्म होती तथा मौसम भी गर्म होता है। इस से कुत्तों मेें खुन का संचार तेज होता है, जिससे यह खुंखार एंव आक्रमक होते हैं। और बगैर किसी देर के यह किसी को भी नौंच लेते हैं। आम लोगो को ऐसे खुंखार कुत्तों से बचाने के लिए इनकी धर पकड का अभियान चलाना बेहद जरूरी है।

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