ट्रांजेक्शन लिमिट के खतरे : पढ़े पूरा लेख..............!

Article Latest Hindi News Bharat Ka Ujalaविश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अति महत्वकांक्षी योजना कैशलेस व्यवस्था को बढावा देने के लिए एक मार्च से कुछेक बैंकों ने बैंकिंग नियमों में कई बडे बदलाव किये हैं तो कई बैंक नये वित्तीय वर्ष के एक अप्रैल से ही अपने नियमों को बदलने को तैयार हैं। इस कड़ी में निजी और सरकारी बैंकों के द्वारा तय सीमा से अधिक बार लेन-देन पर चार्ज वसूलने की तैयारी कर ली है। प्राइवेट सेक्टर के बैंक एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक व आइसीआइसीआइ बैंक ने एक मार्च से फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट के बाद ग्राहक को अब हर ट्रांजेक्शन के लिए फीस और सर्विस चार्ज वसूलने की घोषणा कर दी है। एचडीएफसी बैंक के बचत खाताधारक अब महीने में चार ही बार फ्री ट्रांजेक्शन कर पायेंगे। इससे अधिक बार निकासी करने तथा 2 लाख रूपये जमा पर 150 रूपये सर्विस टैक्स के रूप में चुकाना होगा। इसके साथ ही नॉन होम ब्रांच से एक दिन में 25,000 रूपये की निकासी करने वाले खाताधारकों से किसी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। लेकिन इससे अधिक रकम पर प्रति हजार निकासी पर 5 रूपये या न्यूनतम चार्ज 150 रूपये अदा करने होंगे। इस ट्रांजैक्शन पर भी आपको टैक्स और सेस अलग से अदा करना होगा। एचडीएफसी के मुताबिक बैंक के सीनियर सिटिजन ग्राहकों और नाबालिग बैंक खाताधारकों के लिए प्रति दिन निकासी सीमा 25,000 रूपये रहेगी, हालांकि इन खाताधारकों पर कोई चार्ज अथवा टैक्स नहीं लगेगा। इसके साथ ही नोटबंदी के बाद बैंक द्वारा लगाया गया कैश हैंडलिंग चार्ज तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। वहीं आइसीआइसीआइ बैंक ने होम ब्रांच में किसी खाताधारक द्वारा एक महीने में चार अधिक ट्रांजेक्शन पर न्यूनतम 150 रूपये चार्ज वसूलने का ऐलान कर दिया है। दूसरी ओर एक्सिस बैंक ने हालांकि सैलेरी खाताधारकों को छूट देते हुए महीने में अधिकतम निकासी की सीमा दस बार तथा दस लाख रूपये रखा है। इससे अधिक की निकासी पर 150 रूपये या 5 रूपये प्रति हजार की दर से शुल्क खाताधारकों से वसूला जायेगा। सार्वजनिक सैक्टर के बैंकों में से केवल भारतीय स्टेट बैंक ने अपने नये नियमों की ऐलान कर दिया है जिसके तहत 1 अप्रैल से बचत खाताधारक माह में एटीएम से तीन बार ही कैश ट्रांजेक्शन फ्री में कर पाएंगे। इससे ज्यादा कैश ट्रांजेक्शन करते हैं तो हर ट्रांजेक्शन पर 50 रूपए और सर्विस चार्ज देना होगा। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक के नियम मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। साथ ही बैंक ने व्यवसायिक प्रतिनिधि और पीओएस से नकदी निकालने पर निर्धारित सीमा के बाद शुल्क लगेगा। बैंक के इस कदम के पीछे की वजह डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। सरकार नोटबंदी के बाद लोगों को नकद-रहित और डिजिटल लेन-देन के लिये प्रोत्साहित कर रही है। इस लिहाज से बैंक का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा सकता है। गौरतलब है कि चार बैंकिंग ट्रांजेक्शन का मतलब जमा और निकासी दोनों की संख्या मिलाकर चार है। यानी कि 5वीं बार पैसे जमा करने या निकालने पर 150 रुपए या निर्धारित सर्विस चार्ज देने होंगे। ऐसा लोगों को नकदी के इस्तेमाल के प्रति हतोत्साहित करने के लिए किया गया है। एक तरफ बैंक ट्रांजेक्शन की संख्या के बहाने अपने खाताधारकों से चार्ज वसूलने की तैयारी में है तो दूसरी ओर बैंक बड़े कर्जधारकों के पास फंसी अपनी गैर निष्पादित परिसंपत्ति यानि एनपीए को वापस लाने में असफल ही रहे हैं। बीते साल के तीसरी तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का कुल एनपीए 5.56 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया का कुल एनपीए 7.55 फीसदी, केनरा बैंक का कुल एनपीए 4.27 फीसदी, पीएनबी का कुल एनपीए 6.36 फीसदी, एसबीआई का कुल एनपीए 4.15 फीसदी रहा। वहीं इसी साल अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में प्राइवेट बैंकों में एक्सिस बैंक का कुल एनपीए 1.68 फीसदी, एचडीएफसी बैंक का कुल एनपीए 0.97 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक का कुल एनपीए 4.72 फीसदी रहा। इतना ही नहीं इस दौरान जिंदल स्टील एंड पावर पर 35,500 करोड़ रुपये का, एस्सार स्टील पर 30,000 करोड़ रुपये का, भूषण स्टील पर 33,400 करोड़ रुपये का, जिंदल स्टेनलेस ग्रुप पर 8,500 करोड़ रुपये का, मॉनेट इस्पात पर 9,400 करोड़ रुपये का, इलेक्ट्रोस्टील स्टील पर 8,600 करोड़ रुपये का, वीजा स्टील पर 2,500 करोड़ रुपये का और ऊषा मार्टिन पर 2,550 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन कंपनियों से कर्ज वसूलने में बैंकों के हाथ पांव फूल रहे हैं। सवाल यह कि ट्रांजेक्शन पर बैंकों का ऐलान बिल्कुल सीधा व सरल है ? क्या जिस नकद हस्तांरतण को हतोत्साहित करने के लिए फ्री ट्रांजेक्शन की संख्या घटाई गई है उससे देश में लिक्विड मनी रखने की विवशता प्रबल नहीं होंगी ? गौरतलब है कि देश बैंकों में निम्न आय वाले खाताधारकों की संख्या अधिक है जो अपने बचत खाते में थोड़ी-थोड़ी रकम जमा भी करते हैं और आवश्यकतानुसार उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में निकालते भी हैं। बैंकों के नये नियमों के दायरे में आने से निम्न आय वाले लोग अपनी जमा पूंजी को तरल में ही रखना ज्यादा पसंद नहीं करेंगे जिससे अंततः नुकसान बैंकों का ही होगा ? कहीं ऐसा न हो कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के चक्कर में लोगों के घरों में जमा पूंजी एक तरह से अदृश्य एनपीए को जन्म दे दे। ऐसे में बैंकों का यह फैसला आम आदमी व बैंक दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। गौरतलब है कि प्रत्येक बैंक एटीएम धारकों से महीने में कुछ रूपये एटीएम चार्ज के रूप में काटती है। बेहतर होता कि छोटे खाताधारकों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए बैंक बड़ी रकम के जमा व निकासी पर चार्ज वसूलती एवं छोटे खाताधारकों को इससे मुक्त रखती।
विश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार).................!

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