पब्लिक फंड से भगवान को खुश करने की कवायद : पढ़े लेख

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यूं तो राजनीतिक दलों के नेताओं के द्वारा मंदिर, मस्जिदों,गुरूद्वारों में चढ़ावा चढ़ाना या दर्शन के लिए इन जगहों पर जाना आम बातहै। इसके साथ ही किसी सार्वजनिक शिलान्यास व उद्घाटन समारोह में धार्मिकरस्मांे की अदायगी भी भारत के लिए कोई नया नहीं है। लेकिन इन दिनों भगवानको चढ़ावा चढ़ाये जाने के कारण तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर रावअपने विरोधियों के निशाने पर हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने बीते दिनोंआंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति मंदिर में करीब 19 किलोग्राम सोने केआभूषण चढ़ाए, जिसकी कीमत 5.45 करोड़ रुपये है। बताया गया कि मुख्यमंत्रीने पृथक तेलंगाना के लिए मन्नत मांगी थी इसलिए अलग राज्य बनने के बादउन्होंने भगवान वेंकटेश्वर का आभार व्यक्त करने के लिए यह चढ़ावा चढ़ायाहै। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मंदिर में चढ़ाए स्वर्ण आभूषण सरकारी कोषसे बनवाए गए हैं। खबरों की मानंे तो देश की आजादी के बाद 2000 वर्षपुराने और दुनिया के सबसे समृद्ध मंदिर में किसी राज्य सरकार द्वारा दियागया यह पहला इतना बड़ा दान है। देश के किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री नेअब तक किसी धार्मिक स्थल में इतना बड़ा दान नहीं किया है। राव के इसचढ़ावे में लगभग 3.7 करोड़ रुपये की कीमत का 14.20 किलोग्राम कासालिग्राम नेकलेस और 1.2 करोड़ का 4.65 किलोग्राम का कांटा अभ्रनम शामिलहै। भगवान वेंकटेश्वर पर इस पांच करोड़ के चढ़ावे के अलावा राव ने कुल 59लाख रूपये का चढ़ावा अन्य देवताओं पर भी चढ़ाया है। इसके दो दिनों के बाद चंद्रशेखर राव ने महाबूबाबाद जिले में कुरावीवीरभद्र स्वामी मंदिर में सोने की मूंछ चढ़ाई। चंद्रशेखर राव अपने परिवारके साथ मंदिर पहुंचे और उन्होंने मंदिर के इष्टदेव पर 60,000 रुपये कीमतकी 'सोने की मूंछ' चढ़ाई। इससे पहले अक्टूबर 2016 में भी तेलंगाना केमुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने रविवार को वारंगल में मां भद्रकाली को3.7 करोड़ रुपये मूल्य का स्वर्ण मुकुट चढ़ाया। पत्नी शोभा राव औरमंत्रिमंडल के कुछ सहयोगियों के साथ राव ने मंदिर में 11.7 किलोग्राम वजनका मुकुट चढ़ाया। देवी नवरात्रुलु समारोहों के अवसर पर मुख्यमंत्री नेराज्य सरकार की ओर से चढ़ावा चढ़ाया। इस क्रम में उन्होंने वारंगल के हीकुरावी में भगवान वीरभद्र को सोने की मूंछ, विजयवाड़ा में कनक दुर्गा कोसोने के टॉप्स और तिरुचनुर में देवी पद्मावती को टॉप्स चढ़ाने की मन्नतमांगी थी। मुख्यमंत्री राव ने अलग राज्य के निर्माण की अपनी मन्नत पूरीहोने पर भद्रकाली देवी को मुकुट की यह भेंट चढ़ाई। यानि कुल मिलाकरतेलंगाना राज्य के अस्तित्व में आने के बाद यहां के मुख्यमंत्री ने लगभग10 करोड़ रूपये भगवान को खुश करने के एवज में फूंक दिया। पांच करोड कीमतके जेवरात चढ़ाने के बाद यह सवाल प्रमुखता से खड़ा हो गया है किमुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने यह दान अपनी निजी संपति से किया है यासरकारी खजाने से। हालांकि यह जांच का विषय हो सकता है लेकिन सीधे अभी इसपर कुछ नहीं कहा जा सकता है। तो सवाल कई हैं। मसलन क्या इन चढ़ावों काव्यय अगर मुख्यमंत्री ने निजी खर्चे से किया है तो इस किसी को कोई आपत्तिहोनी चाहिए। शायद नहीं क्योंकि यह आस्था का मामला है कि कौन कहां क्याचढ़ावा चढ़ायेगा। लेकिन जैसा कि विपक्ष का आरोप है कि क्या इसे सरकारीपैसे का दुरूपयोग नहीं माना जा सकता गौरतलब है कि सोने के आभूषणों से परहेज करने वाले राव इन जगहों मेंपूजा करने अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। पूजा-अर्चना के बाद राव ने अपनेप्रण को पूरा करने के लिए और तेलंगाना व आंध्र प्रदेश की बेहतरी के लिएउन्होंने दान देने की बात की। बता दें कि पृतक तेलंगाना राज्य की मांग कोलेकर चलने वाले प्रदर्शन के दौरान तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के मंदिरोंमें देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए सोने के आभूषण चढ़ाने का संकल्पलिया था। अब यह अलग सवाल अलग है कि भगवान को दान देने से राज्य की बेहतरीकैसे हो सकती है। पर जैसा कि राव पर देवी-देवताओं को सरकारी खजाने सेस्वर्ण आभूषण चढ़ा्रए जाने को लेकर सरकारी पैसे की बर्बादी के आरोप लगरहे हैं तो इसकी कड़ी आलोचना की जानी चाहिए। विरोधियों का कहना है किकेवल अपनी निजी मन्नत पूरी होने के लिए राव जनता के खजाने की बर्बादी कररहे हैं। राव पहले भी फिजूलखर्ची के ऐसे विवादों में घिरे थे जब उन्होंने50 करोड़ की कीमत में 9 एकड़ में अपना आलीशान बंगला बनवाया था। गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री इतने समृद्ध हैं कि इन चढ़ावोंपर किया गया खर्च स्वयं उठा सकते हैं। चुनावी हलफनामे में दिये गयेआंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि राव और उनके परिवार की निजी संपतिइतनी जरूर है कि उनके लिए इस दान को निजी खजाने से दिया जाना मुश्किलनहीं है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में चंद्रशेखर राव ने चुनाव आयोगमें दाखिल हलफनामें में बताया था कि उनके और उनकी पत्नी के पास कुल 17करोड़ की संपति है जिसमें से कैश और बैंक में जमा के रूप में 6.29 करोड़रुपये उनकी पत्नी के पास 21 लाख रुपये हैं। इसक अलावा दोनों के पास 6.50करोड़ की अचल संपति भी है। राव तेलंगाना ब्राडॅकास्टिंग प्राइवेट लिमिटेडके चौनल तेलंगाना न्यूज में 55 लाख रुपये मूल्य के शेयर के मालिक भी हैं।तो ऐसे में जनता के पैसे से भगवान को खुश करने की कवायद को क्या माना जाय? क्या राव देवी देवताओं पर चढ़ावों के बहाने अपने राजसी ठाठ बाट काप्रदर्शन कर रहे हैं या फिर इन चढ़ावों का असली मकसद वोट बैंक सहेजने कीपॉलिसी है ? अगर विपक्षियों का आरोप सही है तो माना जा सकता है कि राव काभगवान को दिया गया दान अपनी निजी मन्नतों को पूरा करने के पब्लिक फंड कीबर्बादी के सिवाय कुछ भी नहीं है। विश्वजीत राहा (स्वतंत्रटिप्पणीकार)......................

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