पढ़े : अशोक सपड़ा की कलम से, एक प्यारा सा लेख

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यह व्यंग भरा और जिन्दा मुर्दादिल इंसानो पर पर करारा प्रहार करते हुए एक सन्देश् के साथ हम तीनों ने लिखा है जिसमे आदरणीय सतीश जी और गुरु जी हुकम सिंह ज़मीर साहब और मैं अशोक सपड़ा अगर आपको पसंद आये तो अपने घर जाकर कृपया अपने माँ बाप की सेवा करें धन्यवाद सहित तुम्ही हो माता पिता तुम्ही होतुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही होश्राद्ध पक्ष को दृष्टिगत् रखते हुए काग समिती की आपात कालीन सभा का नजारा ...पारित मुख्य प्रस्ताव -१. उन तर्पण कर्ताओ की खीर पूडी नही खाई जाए जिन्होने जीते जी माँ,बाप को तकलीफे दी!२. एसे तर्पण कर्ता जिन्होने माँ, बाप की बिमार अवस्था मे सेवा सुश्रुषा नही की उनके घर नही जावे!३. जिन्होने माँ,बाप को लाचार कर संपत्ति पर कब्जा जमाया उनके घर पर काँव-काँव करना पर पूडी खीर नही खाना!सतीश शर्माअखिल भारतीय श्वान समिती ने भी कल ही श्वान संसद में पूर्ण ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित किया। श्वान समिति के अध्यक्ष शेरू ने साक्षात्कार में बताया कि उपरोक्त प्रस्तावों पर सहमति प्रकट करने के अतिरिक्त यह निर्णय लिया कि ऐसे मकानों के सामने भी नहीं फटकेंगें।दूसरी ओर सभा में श्वान सदस्याओं की अध्यक्षा जूली ने बताया कि यदि कोई इस पाप में लिप्त पाया गया तो श्वान समाज की कोई सदस्या उससे संसर्ग नहीं करेगी जिससे कि उस श्वान की मर्यादाहीन संतति इस संसार में ना आ सके।श्वान वीर शावकों के शावक नेता टॉमी ने भी अपने सभी श्वान शावकों को मानव समाज में सामाजिक मूल्यों की पुनर्स्थापना को अपना उत्तरदायित्व समझते हुए अपने साथियों से इस पावन कार्य में अपने माता पिता व बड़े बुजुर्गों के निर्णय के क्रियान्वयन में अपनी आहूती देने का संकल्प पत्र भरवाया गया।गौवंश की प्रतिक्रिया के लिये हमारे संवाददाता हिंगोनियां गौशाला गये हैं उनसे हमारा सम्पर्क नहीं हो पा रहा है। जैसे ही कोई सूचना उपलब्ध होगी ब्रेकिंग न्यूज में आपको अपडेट किया जायेगा।Dsp हुकम सिंह ज़मीरआख़िरकार संवाददाता जी से संपर्क हुआ तो पता चला को उनको समय मिल गया था वहा की प्रधान गौ माता से मिलने का पर चूंकि वाह पितृ पक्ष को लेके सब की मीटिंग ली जा रही थी सभी गौ को वहाँ की प्रधान गौ एक निर्देश दे रही थी की कोई भी अब उन घर की रोटी हरी पालक या पूड़ी पकवान को देखेगा भी नहीं और ना ही उन लोगो को अपनी पूजा करने देगा जो मतलब सिद्ध करने के लिए हमारी पूजा करते हैं अपनी इच्छाएं पूर्ति की खातिर हमको कच्चे आटे के अंदर गुड़ मिलाकर खिलाते है और जब हम इन मानव के घर जाती है तो हमको दुत्कार दिया जाता है या लाठी से मारा जाता है हमने इनको पाला पोसा और ये मानव अपने माँ बाप को भूल गए तो हमको क्यों याद रखेगेंजब सवांददाता ने एक बुजुर्ग गौ माँ को प्रणाम करके पूछा कि आखिर आप तो माँ है और माँ अपने बच्चों से कैसे नाराज हो सकती है तो गाऊँ माता रो पड़ी और छलकते आसुंओ से बोली जब मुक्ति चाहिए तो हम याद आते है जब इच्छा पूर्ति के लिये इनको पूजा करनी होती है तो हम याद आती है वरना हमको जानवर से ज्यादा कहा समझा है इन मानव जाति ने वो तो वो नंदलाल ही थी जिसको याद कर के आज भी हमारे आंसू नहीं थमते और आज भी उसको याद करती है कि कब कल्कि अवतार में आएगा और हमको इस नर्क से छुटकारा दिलवायेगा तुम मानव ने हमारा जीवन नर्क करके रख दिया है और हमसे चाहते हो की हम तुम्हारे किये पाप के भागी बने कादपि नहीं हो सकता यहमत भूलों की पृथिवी माँ को हमारे वंशज ने ही सर पर धरा है जिस दिन हम को तुम मानव जाति पर गुस्सा आया तो सर हिलाने की देर है सारा विध्वंस हो जायेगा सुनो मानव सबसे पहले पितृपक्ष की पूजा से पहले यह जान लो जो तुम्हारे घर पर माँ बाप है जिन्होंने वर्तमान में तुमको पाला पोसा है पहले अपने घर में जाकर उनकी पूजा करो हम क्या सभी पूर्वज खुश हो जायेंगे सभी देवी देवता मुझ में वास करते है तो मैं खुश तो सभी खुश हो जायेंगेतुम माँ वैष्णवी को मनाने जाते है पर कभी सोचा है कि तुम अपने घर में माँ को नहीं पूछते और उस जगत जननी को मनाने जाते हो अरे वो जगत जननी है माँ कभी बच्चों से नाराज नहीं होती पर गुस्सा तो उस माँ को भी तुम पर आता है हम को तो जानवर कहते हो लेकिन उस परब्रह्मा ने तुमको तो दिमाग दिया है इस दिमाग से काम लो जाओ पहले अपने घर में अपने माँ बाप की सेवा करो पहले भोग अपने हाथों से उनको दो हम तो बाद में भी भोग लगाकर खुश हो जायेंगे स्वर्ग की सीढ़ी कही और से नही माँ पिता के चरणों से होकर गुजरती है अगर इस सन्देश को दे सकते हो सबमे तो दो और हाँ वो श्वान और कागो का निर्णय बिलकुल ठीक है मैं उनसे बिलकुल सहमत हूँ हम अपने जानवर होकर इतना सोच सकते है तो क्यों तुम अपनी इंसानियत को शर्मसार करते हो जाओ पहले उन माँ बाप को अपने घर में वापिस लाओ जिनको अनाथ बना दिया है तुमने ,अपने होते और जिनकी जीते जी खुशियाँ छीन ली है तुमने, अगर तुम ने हमारा कहा माना तो हम सब तुम्हारे घर आशीर्वाद देने जरूर आयेंगे ये तुम्हारी गौ माता का वचन है जाओ अबअशोक सपड़ा की कलम से दिल्ली से

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