उल्टा न पड़ जाये यह दांव : पढ़े पूरा लेख................!

विश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार)Latest Hindi Article Bharat Ka Ujala

अंततः काफी मशक्कत के बाद भाजपा ने यूपी की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंप दी। गोरखपुर से लगातार पांच बार संसद बन चुके योगी के सामने यूपी को विकास के रास्ते ले जाने की चुनौती होगी। इसके साथ ही करीब 20 करोड़ की आबादी वाले सूबे में नए सीएम को कई चुनौतियों से दो-चार होना पड़ेगा। भाजपा ने यूं तो चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का वादा किया था लेकिन सूबे में जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले और प्रचार के दौरान भाजपा ने प्रदेश की जनता से कई महत्वपूर्ण वादे किए थे जिसे पूरा करना योगी के लिए एक कठिन चुनौती होगी। योगी के लिए सबसे पहले अपनी छवि को सर्वमान्य बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। कट्टर हिन्दूवादी छवि होने के कारण योगी के मुख्यमंत्री बनते ही कईयों के मन में तरह-तरह के सवाल उभरने लगे हैं। ऐसे में उनके सामने प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना बेहद चुनौतिपूर्ण होगा। बहुत संभव है कि कुछेक कथित तालिबानी हिन्दू संगठन प्रदेश का माहौल खराब करने की कोशिश करे जैसा कि बरेली में देखा गया। गौरतलब है कि यूपी में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलते ही बरेली के एक गांव से एक समुदाय विशेष को गांव छोड़ने से संबंधित पोस्टर चिपकाया गया था। ऐसे में ऐसे अराजक तत्वों को काबू कर योगी के सामने यूपी को विकास के रास्ते पर ले जाने की चुनौती है। ऐसे भी भाजपा के सबका साथ सबका विकास का नारा बहुत हद तक सांप्रदायिक सद्भाव पर निर्भर करता है। प्रदेश के लगभग सभी धर्म और जाति के लोगों ने भाजपा की सरकार बनाने में अपना अहम योगदान दिया है। ऐसे में नए मुख्यमंत्री के पास सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने का बेहतरीन मौका है। हालांकि योगी के कट्टर हिन्दूवादी छवि के कारण इसमें कई शंकाएं भी हैं। दूसरी ओर हालांकि पिछले विधायकों की तुलना में इस बार आपराधिक छवि वाले विधायकों की संख्या कम हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां 47 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मुकदमे थे वहीं इस बार 36 फीसदी विधायकों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के नवनिर्वाचित विधायकों में 143 पर हत्या, दुष्कर्म जैसे मामले दर्ज हैं। एडीआर के मुताबिक वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय औसत का दोगुना अपराध होता है। उगाही और हिंसा प्रदेश में व्यवसाय व निवेश को बढ़ावा देने की पहल पर पानी फेर सकते हैं। ऐसे में प्रदेश को अपराध मुक्त करने के वादे को निभाने की भी चुनौती योगी पर होगी। नए सीएम के पास मौका है कि वह प्रदेश में निवेश लायक माहौल बनाने के लिए स्थानीय पुलिस को मजबूत करे और अपराधी गिरोहों का सफाया करे। भाजपा के बतौर फायर ब्रांड नेता के रूप में पहचान बना चुके योगी के समक्ष भ्रष्टाचार एक और बड़ी चुनौती होगी। सत्ता से दूर रहते हुए भाजपा नेताओं ने सपा सरकार पर जमीनों पर कब्जे के आरोप लगाए थे। अब ऐसे भ्रष्टाचारियों पर कठोर कार्रवाई करने का दबाव होगी। इसके साथ ही नई सरकार को सरकार में पारदर्शिता, नौकरशाह को जवाबदेह बनाने और लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाना होगा। इसके अलावे यूपी के मूलभूत समस्याओं की बात करें तो शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के मामले में भी प्रदेश की हालत बेहद खराब है। शैक्षणिक स्तर पर आज भी यह प्रदेश कई छोटे राज्यों से भी पिछड़ा हुआ है। वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट के मुताबिक हरेक एक हजार लोगों में 58 बेरोजगार हैं जबकि भारत का औसत 37 है। युवाओं में बेरोजगारी की दर सबसे अधिक है। 18 से 29 साल के बीच के प्रति हजार युवाओं में 148 बेरोजगार हैं। जबकि पूरे भारत का औसत 102 है। रोजगार की तलाश में पलायन भी यहां की एक बड़ी समस्या है। वर्ष 2001 से 2011 के बीच 20 से 29 साल के 58 लाख लोग काम की तलाश में दूसरे शहर चले गए। ऐसे में रोजगार के अवसर बढ़ाना सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। अगर योगी सरकार प्रदेश में गुंडागर्दी को खत्म कर पाती है तो निवेश के रास्ते खुलेंगे जिससे बेरोजगारों को रोजगार भी मिल पायेगा। नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा प्रसूता की मौत के मामले में देश को सबसे बड़ा प्रदेश दूसरे नंबर पर है। वहीं आधे नवजात बच्चे कम विकसित होते हैं। राज्य में हर दूसरे बच्चे को टीका नहीं लगता है। शिशु मृत्यु दर 64 प्रति हजार है जो देश में सबसे अधिक है। प्रदेश में विशेषज्ञ डाक्टरों और नर्स की अत्यधिक कमी है। भाजपा ने इन समस्याओं के निदान के लिए अपने संकल्प पत्र मंे हर गांव में प्राइमरी सब सेंटर खोलने का वादा किया था जिसे पूरा करना योगी के लिए आसान नहीं होगा। इसके साथ ही भाजपा ने संकल्पपत्र में सरकार बनने के बाद बुंदेलखंड विकास बोर्ड और पूर्वाचल विकास बोर्ड के गठन की बात कही थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जहां बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर कब्जा जमाया है, वहीं पूर्वाचल में भी उसने काफी शानदार प्रदर्शन किया है। योगी पर इसका गठन कर उन इलाकों के विकास का भी दबाव होगा। इतना ही नहीं योगी के सामने पहली कैबिनेट बैठक में यूपी के किसानों के कर्ज माफ करने का भी दवाब है। उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी एक विकट समस्या है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक उत्तर प्रदेश के 60 फीसदी से ज्यादा घरों में बिजली नहीं है। नए सीएम के सामने राज्य विद्युत बोर्ड का पुनर्गठन एक बड़ी चुनौती होगी। योगी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि बिजली की कीमत बिना बढ़ाये बिजली की स्थिति सुधारी जाय। क्योंकि अगर बिजली के दाम बढ़ाये गये तो यह 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुसीबतें पैदा कर सकतीं हैं। उम्मीद कि योगी इन चुनौतियों का बखूबी सामना कर प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जायेंगे। जनता ने जिस उत्साह से भाजपा को तिहरे शतक का आंकड़ा पार कराया है योगी को भी उसी उत्साह व संयम से जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा अन्यथा चुनावी वादे कहीं जुमले न साबित हो जाये। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो भाजपा ने योगी को देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता सौंप कर बड़ा दांव खेला है वह 20119 के लोकसभा चुनाव में उल्टा भी पड़ सकता है।
विश्वजीत राहा (स्वतंत्र टिप्पणीकार).............

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