न्यूयॉर्क: पाकिस्तान में आतंक के साए में जी रहीं क्रिश्चियन महिलाएं

न्यूयॉर्क: पाकिस्तान में आतंक के साए में जी रहीं क्रिश्चियन महिलाएंपाकिस्तान में आतंक के साए में जी रहीं क्रिश्चियन महिलाएं

न्यूयॉर्क : पाकिस्तान में क्रिश्चियन महिलाओं पर बहुत अत्याचार हो रहा है। वे हर समय खौफ के साए में जी रही हैं। यह खुलासा वहां कि एक मुस्लिम समाज सेवी संस्था (एनजीओ) मूव्मेंट फॉर सॉलिडेरिटी एंड पीस ने किया है। इस एनजीओ के मुताबिक, पाकिस्तान में हर साल लगभग 700 क्रिश्चियन महिलाओं के साथ बलात्कार, अपरहण और उन्हें जबरन मुस्लिम युवकों से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है। हालिया घटना में तीन पाकिस्तानी क्रिश्चियन लड़कियों ने कुछ अमीर मुस्लिम युवकों का कहना मानने से इंकार कर दिया तो उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। इस घटना में एक क्रिश्चन लड़की की मौत हो गई। ब्रिटिश पाकिस्तानी क्रिश्चियन एसोसिएशन के चेयरमैन और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट विल्सन चौधरी ने बताया कि क्रिश्चियन लड़कियों के साथ यह दर्दनाक घटना 13 जनवरी को लाहौर में हुई थी। चौधरी ने बताया कि इन तीन क्रिश्चिन लड़कियों की उम्र 17, 18 और 20 साल थी। ये तीन लड़कियों पैदल अपने घर की ओर जा रही थीं। तभी चार मुस्लिम युवक जो अपनी गाड़ी में थे, इनका पीछा करने लगे। कुछ देर बाद इन्होंने लड़कियों पर फब्तियां कसनी शुरू कर दीं। ये युवक इन लड़कियों को गाड़ी में बैठने के लिए कहने लगे। इन लड़कियों ने मुस्लिम युवकों की बात नहीं मानी और डर के वहां से भागने लगीं। उन्होंने बताया कि मुस्लिम युवकों ने जब देखा की क्रिश्चिन लड़कियां भाग रही हैं, तो उन्होंने इन्हें गाड़ी से जोर की टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दो लड़कियां जमीन पर गिर गई। इनमें से एक की कुल्हे की हड्डी टूट गई और दूसरी की पसलियां चकनाचूर हो गईं। वहीं इन तीनों में सबसे छोटी 17 साल की किरन टक्कर लगने से हवा में उछल गई और दूसरी गाड़ी के शीशे पर जाकर गिरी। इसे भी काफी चोट आई है। इस दौरान एक मुस्लिम युवक कहता सुना गया कि क्रिश्चिन महिलाएं, सिर्फ मुस्लिम लड़कों की जिस्मानी इच्छाओं को पूरा करने के लिए यहां हैं। उन्हें ऐसा करने से मना नहीं करना चाहिए। चौधरी ने बताया कि पुलिस ने इन क्रिश्चिन महिलाओं की तरफ से केस तो दर्ज कर दिया है, लेकिन हमेशा की तरह मामले की जांच में देरी कर रही है। उन्होंने बताया कि यहां क्रिश्चिन के खिलाफ होने वाली हिंसा की घटनाओं की जांच अपने अंजाम तक बहुत कम पहुंच पाती हैं, इसलिए इन्हें न्याय नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि यहां महिलाओं को वो अधिकार प्राप्त नहीं हैं, जो दूसरे देशों में हैं। यहां महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इस दर्दनाक घटना के बाद तो क्रिश्चिन लड़कियां अपने आप को आतंक के साए में जकड़ा हुआ महसूस कर रही हैं।

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