कानपुर रेल हादसे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा : पढ़े

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कानपूर : जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे एक भयानक आवाज गूंजी इंदौर से पटना जा रही ट्रेन के 14 कोच पटरी से उतर गए कई बोगियां पिचक गईं कोच दूसरे कोच पर चढ़ गए हादसे में 156 लोगो की मौत हो गई और 200 से ज्यादा जख्मी हैं पूरे मामले पर ट्रेन के ड्राइवर ने एक रिपोर्ट दी है इस रिपोर्ट में बताया गया है कि झांसी के बाद ही उन्हें खतरे के बारे में पता चल चुका था जिसके बारे में उन्होंने असफरों को भी बताया था लेकिन उन्होंने ट्रेन को कानपुर तक ले जाने के लिए कहा ड्राइवर ने बताई हादसे की वजह रात करीब 1 बजे ट्रेन ड्राइवर जलत शर्मा ने अफसरों को खतरे के संकेत दे दिए थे झांसी से चलने के बाद दो स्टेशन पार होते ही उन्हें इंजन मीटर पर अधिक लोड दिखा उन्होंने तत्काल सहयोगी डीपी यादव को बताया इसके बाद झांसी मंडल के अफसरों को सूचना दी लेकिन वहां से कहा गया कि ट्रेन को जैसे-तैसे कानपुर तक ले जाओ, फिर देखेंगे झांसी डिविजन के इस ड्राइवर ने सेंट्रल स्टेशन पर चालक लॉबी में सौंपी रिपोर्ट में बताया कि तड़के 3:03 बजे ओएचई केबल (ओवरहेड इलेक्ट्रिक केबल) में तेज धमाके के बाद उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाए जिस समय ट्रेन हादसे का शिकार हुई, उसकी स्पीड 110 किमी प्रति घंटा थी ओएचई में धमाके से लाइन ट्रिप नहीं होती तो पूरी ट्रेन में आग लग सकती थी ट्यूब जैसी हो गई थी बोगी, खिड़कियों से मदद की गुहार लगा रहे थे यात्री हादसे के बाद मदद के लिए सबसे पहले पहुंचे पुखरायां के पुष्कल पराग दुबे ने भास्कर को बताया कि मेरा घर घटनास्थल से 2 किमी दूर है तड़के 3:00 बजे के करीब तेज धमाके की आवाज आई।कुछ देर बाद एक मित्र अनादि मिश्रा का फोन आया बताया ट्रेन पलट गई है हम तुरंत चार अन्य दोस्तों को लेकर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए अंधेरे और कोहरे में स्पष्ट दिख नहीं रहा था कुछ रेलकर्मी और पुलिसवाले टॉर्च जलाते हुए दिखे पास गए तो नजारा बेहद भयावह था बी-2 कोच मुड़कर ट्यूब जैसा हो गया था ट्रेन की खिड़कियों से लोग हाथ निकालकर बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहे थे एस-3, एस-2 कोच एक-दूसरे पर चढ़े थे कुछ पुलिसवाले और हादसे में जीवित बचे यात्रियों के साथ हम घायलों को निकालने में जुट गए हमने मंडी समिति पुखरायां के प्रधान भारत सिंह से बात की और पास की एक ट्रॉली फैक्टरी से गैस कटर मंगवाया और कोच काटकर लोगों को निकालना शुरू कर दिया झटके से बर्थ के नीचे गिरा, कुछ दबे थे, पूरी बोगी में चीख-पुकार मची थी ट्रेन में सवार नीलेश बघेल ने भास्कर को बताया कि बी-2 की 64 नंबर बर्थ पर मैं सो रहा था अचानक तेज धमाका हुआ झटके से मैं बर्थ के नीचे गिर गया पता चला ट्रेन पलट गई है कुछ लोग दबे थे दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो नजारा दिल दहलाने वाला था बाहर निकला तो देखा कि लाशें पड़ी थीं करीब आधा घंटे बाद पुखरायां के कुछ लोग आए उन्होंने ट्रेन में फंसे लोगों को निकालना शुरू किया गांव वाले ने मुझे निकाला इसके बाद शताब्दी से भोपाल पहुंच गया।

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