गिरा रहेगा रुपया तो देश रहेगा कमजोर, भिखारी और कर्जदार : पढ़े पूरा लेख

2016-11-28 05:30:59.0

गिरा रहेगा रुपया तो देश रहेगा कमजोर, भिखारी और कर्जदार : पढ़े पूरा लेख

पूर्ण प्रजातांत्रिक संविधान की रूपरेखा ........
अधिकारः- देश के सब नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त होगा और सबको अपने-अपने धर्म के अनुसार जीने की और बोलने-लिखने और व्यापार-पेषा करने की तथा देश में कहीं भी जाने-रहने की और सम्पति खरीदने-बेचने की पूरी आजादी होगी.
निषेधः- व्यापार करना राज्य का काम नहीं है, प्रजा का काम है. अतः सरकारें किसी भी रूप में व्यापार नहीं करेगी. क्योंकि राज्य रक्षा करने वाली और टैक्स से चलने वाली संस्था है और राज्य का सारा रुपया सुरक्षा-व्यवस्था और न्याय-व्यवस्था के लिए है.
यात्री जहाजों, हवाईजहाजों, बसों, ट्रेनों, भाड़ा मालगााडि़यों और उद्योगों-बैंकों आदि का संचालन करना व्यापार का हिस्सा है. अतः सरकारों का इनका संचालन करना राज्य विरोधी कृत्य होगा. क्योंकि राज्य व्यापारी नहीं है. इसी तरह से बांध बनाना राज्य का काम है, लेकिन सार्वजनिक बिजली का उत्पादन और आपूर्ति करना राज्य का काम नहीं है. क्योंकि उत्पादन और पूर्ति करना व्यापार की श्रेणी में आ जाता है. सरकारों के व्यापार करने से देष को भारी नुकसान होगा. क्योंकि सरकारी व्यापार में लगने-डूबने वाला रुपया सुरक्षा-व्यवस्था और न्याय-व्यवस्था का होने से रुपयों के अभाव में सरकारें न्यायालयों और न्यायाधीषों की कमी, सैन्य और पुलिस बलों की कमी, आधुनिक षस्त्रों, उपकरणों, साधनों आदि की कमी, जेलों और थानों की कमी, सड़कों की कमी, सड़कों के रख-रखाव की कमी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल सड़कों की कमी, मेट्रो और बुलेट ट्रेनों के अनुकूल पटरियों की कमी और पोर्ट-एयरपोर्ट आदि की कमी को पूरा नहीं कर पाएगी और व्यापार करना राज्य का काम नहीं होने से सरकारी यात्री जहाज, हवाईजहाज, बसें, ट्रेनें, भाड़ा मालगााडि़यां और व्यापार-उद्योग और बैंकें आदि देष को भयंकर घाटा देंगे और इनके भयानक घाटों को पूरा करने के लिए और इनमें और रुपयें फूंकने-डुबाने के लिए सरकारों को विदेषों से कर्ज पर कर्ज लेना पड़ेगा और नाजायज और लूटपाट वाले टैक्स लगा लगा कर प्रजा को लुटना पड़ेगा.
सैन्य और पुलिस बलों की कमी से और आधुनिक षस्त्रों-उपकरणों, साधनों आदि की कमी से सेना और पुलिस के जवान लगातार षहीद होंगे तो जनता जान-माल से हाथ धोएगी और न्यायालयों और न्यायाधीषों की कमी से जनता को न्याय अति विलंब से मिलेगा.
कमजोर सुरक्षा-व्यवस्था से और कमजोर न्याय-व्यवस्था से और नाजायज और लूटपाट वाले टैक्सों से और सरकारों के व्यापार करने से देष मेें व्यापार नहीं बढ़ेगा और व्यापार के नहीं बढ़ने से बेरोजगारी बढ़ेगी और करंसी कमजोर हो जाएगी और देष की अर्थ-व्यवस्था कमजोर हो जाएगी और देष डोनेषन के रूप में विदेषी भीख और कर्जों का मोहताज हो जाएगा.
कानूनः- कानून बनाने वाली संस्था संसद ही रहेगी, लेकिन उसका नाम राष्ट्रसभा रहेगा. राज्यों में कानून बनाने वाली संस्था विधानसभा ही रहेगी. राष्ट्रसभा-विधानसभा के सदस्य कानूनीज्ञाता, अर्थविद्, शिक्षाविद्, चिकित्साविद्, समाजशास्त्री आदि होंगे.
कानून बनाना, टैक्स तय करना, कर, अर्थ, षिक्षा और चिकित्सा नीति बनाना राष्ट्रसभा-विधानसभा के काम होंगे.
सर्वोच्च न्यायालय देश भर से उपर्युक्त प्रतिभा वालों का चयन कर राष्ट्रसभा सदस्य बनाएगा. यही प्रक्रिया राज्यों में विधानसभा सदस्यों के लिये उच्च न्यायालय करेंगे. नगरपालिका की नगरसभा के सदस्यों का चयन जिला न्यायालय और पंचायतों की ग्रामसभा के सदस्यों का चयन न्यायालय करेंगे.
शासनः- वर्तमान में जो राज्यसभा है वह केन्द्रीय राज्यसभा कहलाएगी और देश का शासन संचालन वहां से होगा. राज्यों में राज्यसभा की स्थापना होगी और राज्यों का शासन संचालन वहां से होगा. चुनावों में जो भी विजयी होंगे वे केन्द्रीय राज्यसभा व राज्यों में राज्यसभा के सदस्य होंगे.
देश में राष्ट्रपति प्रमुख और राज्यों में मुख्यमंत्री प्रमुख होंगे. राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री का चुनाव विजयी सदस्यों में से विजयी सदस्य करेंगे. अन्य मंत्रियों की नियुक्तियां विजयी सदस्यों में से राष्ट्रपति राष्ट्रसभा की और मुख्यमंत्री विधानसभा की सम्मति से करेंगे.
राष्ट्रपति राष्ट्रसभा की सम्मति से और मुख्यमंत्री विधानसभा की सम्मति से कार्य करेंगे. इसी तरह से नगरपालिका अध्यक्ष नगरसभा की सम्मति से और सरपंच ग्रामसभा की सम्मति से कार्य करेंगे.
न्यायः- न्यायसभा सदस्य न्यायविद् आदि होंगे.
न्याय प्रणाली बनाना, न्यायाधीशों की नियुक्ति, वेतन, बदली, पदोन्नति, सेवामुक्ति, पेंषन आदि कार्य न्यायसभा के होंगे.
सर्वोच्च न्यायालय देश भर से उपर्युक्त प्रतिभा वालों का चयन कर न्यायसभा सदस्य बनाएगा. यही प्रक्रिया राज्यों में न्यायसभा सदस्यों के लिये उच्च न्यायालय करेंगे.
उपर्युक्त सबका कार्यकाल पांच वर्ष रहेगा.
राष्ट्रसभा, विधानसभा, नगर सभा और ग्रामसभा की अवहेलना करने वाले राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष और सरपंच को पद से हटाने का अधिकार क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय और न्यायालय को होगा.
ये लेख ओम जैन की कलम से.....

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