रॉन्ग टोल टैक्स..................पढ़े पूरी स्टोरी................

2016-11-28 05:30:14.0

रॉन्ग टोल टैक्स..................पढ़े पूरी स्टोरी................

टोल टैक्स नाजायज इसलिए है कि सड़कें बनवाना राज्य का काम है और राज्य रोड़टैक्स ले ही रहा है तो सड़क निर्माण कम्पनियों को भुगतान सरकारों को करना है. लेकिन सड़क निर्माण का राज्य का अधिकांष रुपया व्यापार में बरबाद करने से सड़क निर्माण कम्पनियों का भुगतान करने में असमर्थ सरकारों ने सड़क निर्माण कम्पनियों का भुगतान प्रजा के मत्थे मढ़ दिया टोलटैक्स के रूप में ताकि प्रजा नाजायज टोलटैक्स को भुगतती रहे और सरकारें सड़क निर्माण का राज्य का अधिकांष रुपया राज्य विरोधी कामों में यानी यात्री जहाजों, हवाईजहाजों, बसों, रेलों, भाड़ा मालगाडि़यों और व्यापार-उद्योगों और बैंकों आदि के संचालन में फूंकती रहे. सड़कें बनवाना, पटरियां बिछवाना और पोर्ट-एयरपोर्ट बनवाना पूर्णरूप से राज्य का काम है. क्योंकि इनका निर्माण सुरक्षा-व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन यात्री जहाजों, हवाईजहाजों, बसों, रेलों, भाड़ा मालगाडि़यों और उद्योगों-बैंकों आदि का संचालन करना राज्य का काम नहीं है. क्योंकि इनका संचालन व्यापार का हिस्सा है और राज्य व्यापारी नहीं है. इसी तरह से बांध बनाना राज्य का काम है, लेकिन सार्वजनिक बिजली का उत्पादन और आपूर्ति करना राज्य का काम नहीं है. क्योंकि उत्पादन और पूर्ति करना व्यापार की श्रेणी में आ जाता है और व्यापार करना प्रजा का काम है. राज्य रक्षा करने वाली और टैक्स से चलने वाली संस्था है और राज्य का सारा रुपया सुरक्षा व्यवस्था और न्याय व्यवस्था के लिए है. सरकारों के व्यापार करने से देष को भारी नुकसान हो रहा है. क्योंकि सरकारी व्यापार में लगने-डूबने वाला रुपया सुरक्षा व्यवस्था और न्याय व्यवस्था का होने से रुपयों के अभाव में सरकारें न्यायालयों और न्यायाधीषों की कमी, सैन्य और पुलिस बलों की कमी, आधुनिक षस्त्रों, उपकरणों, साधनों आदि की कमी, जेलों और थानों की कमी, सड़कों की कमी, सड़कों के रख-रखाव की कमी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुकूल सड़कों की कमी, मेट्रो और बुलेट ट्रेनों के अनुकूल पटरियों की कमी और पोर्ट-एयरपोर्ट आदि की कमी को पूरा नहीं कर पा रहीं है. सैन्य और पुलिस बलों की कमी से और आधुनिक षस्त्रों-उपकरणों, साधनों आदि की कमी से सेना और पुलिस के जवान लगातार षहीद हो रहे है तो जनता जान-माल से हाथ धो रहीं है और न्यायालयों और न्यायाधीषों की कमी से जनता को न्याय अति विलंब से मिल रहा है. कमजोर सुरक्षा व्यवस्था से और न्याय के देर से मिलने से और नाजायज और लूटपाट वाले टैक्सों से और सरकारों के व्यापार करने से देष मेें व्यापार नहीं बढ़ रहा और व्यापार के नहीं बढ़ने से बेरोजगारी बढ़ गयी और रुपया गिर गया और देष की अर्थ व्यवस्था कमजोर हो गयी और देश डोनेषन के रूप में विदेषी भीख और कर्जों का मोहताज हो गया. अतः सरकारें राज्य के अधीन चलने वाले यात्री जहाजों, हवाईजहाजों, बसों, रेलों, भाड़ा मालगाडि़यों और समस्त सार्वजनिक व्यापार-उद्योगों और बैंकों आदि का निजीकरण करें और निजीकरण से प्राप्त हुए धन से पहले विदेषी कर्ज चुकाए ताकि देष को विदेषी कर्ज और ब्याज से मुक्ति मिले. फिर सरकारें आंतरिक कर्ज चुकाए. टोल कम्पनियों को भुगतान कर देश की सड़कों को टोलनाकों से मुक्त कराए, न्यायालयों और न्यायाधीषों की कमी को पूरा करें, सैन्य और पुलिस बलों की कमी को पूरा करें और सुरक्षा व्यवस्था के अधूरे कामों को पूरा कर सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाए. राज्य के अधीन चलने वाले यात्री जहाजों, हवाईजहाजों, बसों, रेलों, भाड़ा मालगाडि़यों और समस्त सार्वजनिक सरकारी व्यापार-उद्योगों और बैंकों आदि का निजीकरण होते ही उनका विकास और विस्तार तेजी से होगा और बेरोजगारी समाप्त होगी और पेट्रोलियम पदार्थ आदि के आयात के मुकाबले निर्यात ज्यादा होगा और देष हर तरह से समृद्ध होगा और रुपया डॉलर से ऊपर होगा.
ये लेख ओम जैन की कलम से.......

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