50 दिन की अवधि पूरी होने को सब्जी मंडी के नहीं सुधर रहे है हालात

2016-12-28 10:15:54.0

50 दिन की अवधि पूरी होने को सब्जी मंडी के नहीं सुधर रहे है हालात

नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी के बीच पचास दिन में हालात सुधार के किए गए दावे किए गए, लेकिन अवधि पूरी होने की स्थिति में है लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे है। राजधानी दिल्ली की गाजीपुर सब्जी मंडी के हालात उठाकर देखे तो किसान को उसकी फसल का हक भी नहीं मिल रहा है। किसानों को ये नहीं सूझ रहा है कि आखिर वह परिवार का पालन पोषण कैसे करें। आढती भी ये नहीं तय कर पा रहे है कि किसान को उसकी फसल का हक कैसे दिलाए। मजे की बात ये है कि जिस क्षेत्र में ये सब्जीमंडी आती है सांसद भी बीजेपी से है उनका भी मंडी के हालात पर ध्यान नहीं है। मार्केट एसोसिएशन के प्रधान कालू राम की मानें तो कंेद्र और दिल्ली सरकार द्वारा दिहाडी मजदूर की मजदूरी रेट साढे चार सौ तय किया हुआ है,लेकिन मंडी में देखा जाए तो किसान जो सब्जी लेकर पहुंचता है उसे सब्जी का मूल रेट तो दूर डेढ सौ रूपए की दिहाडी भी नसीब नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि मार्केट में मौजूदा में हरी मटर का रेट 9 रूपए किलो, आलू 5 से 6 रूपए और टमाटर 10 रूपए सिमला मिर्च 8 रूपए किलो है। इसी तरह से बंद गोभी 5 रूपए किलो तो पत्ता गोभी 6 रूपए किलो में आसानी से उपलब्ध है। अशोक खेडा कहते है कि उन्हें दूर तक भी ऐसा नहीं लगता कि हालात हाल फिल्हाल सुधर जाएंगे। आज भी ज्यादातर एटीएम बंद है या उनमें पैसा नहीं है। बैंक शाखाओं से अभी भी पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार को चाहिए था कि नोट बंदी से पहले तमाम बैंक शाखाओं और एटीएम की स्थिति का एक बार अध्ययन कराती।

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