बेंगलुरु जेल में कैदी नंबर 9935 बना शशिकला की नई पहचान

बेंगलुरु जेल में कैदी नंबर 9935 बना शशिकला की नई पहचानबेंगलुरु जेल में कैदी नंबर 9935 बना शशिकला की नई पहचान

बेंगलुरु : आय से अधिक संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से शशिकला को दोषी करार दिए जाने और सरेंडर करने के लिए मोहलत देने से इनकार करने के बाद शशिकला ने आखिरकार बेंगलुरु जेल में सरेंडर कर दिया। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। बुधवार शाम वह बेंगलुरु की जेल (परप्पना अग्रहरा) पहुंची। शशिकला और इल्लावरासी को परप्पना अग्रहरा जेल परिसर में सेशंस जज के सामने आत्मसमर्पण के बाद जेल भेजा गया। रिपोर्टों के अनुसार, शशिकला ने जेल के एक सेल में साधारण कैदी की तरह पहली रात बिताई। बेंगलुरु जेल में वह सीमेंट से बने फ्लोर पर पहली रात सोईं। 61 वर्षीय एआईएडीएमके प्रमुख को कोई वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया गया। चूंकि जेल प्रशासन ने उन्हें कोई विशेष सुविधा देने से इनकार कर दिया। जेल में उन्हें केवल एक पंखा, एक तकिया, एक कंबल और एक चादर मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा, जेल में प्रवेश के बाद उन्हें तीन साड़ी और ब्लाउज पहनने के लिए दिया गया है। जानकारी के अनुसार, शशिकला जेल के महिला ब्लॉक में हैं और उनकी रिश्तेदार इल्लावरासी के साथ बैरक में रहेंगी। जेल में शशिकला को कैदी नंबर 9435 के तौर पर पहचाना जाएगा जबकि उनके साथ जेल गई इलावारसी कैदी नंबर 9436 होंगी। शशिकला ने कोर्ट को बताया कि उन्हें उनकी संरक्षक रही जयललिता की बैरक के पास वाली बैरक ही दी जाए। बताया जा रहा है कि शशिकला को जेल में अलग से सेल भी नहीं मिली है। उन्हें दो अन्य महिलाओं के साथ सेल में रहना पड़ेगा और कठिन परिश्रम भी करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि जेल में उन्हें प्रतिदिन के 50 रुपए मिलेंगे और वह वहां मोमबत्तियां बनाएंगी। साथ ही उन्हें कोई छुट्टी भी नहीं मिलेगी। इससे पहले, अन्नाद्रमुक की प्रमुख वीके शशिकला को बुधवार को जेल भेज दिया गया। उन्होंने यहां की एक अदालत में आत्मसमर्पण किया। सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के दो दशक पुराने मामले में उनकी सजा बहाल कर दी थी। शशिकला ने विशेष अदालत के न्यायधीश अश्वतनारायण के समक्ष आत्मसमर्पण किया। चेन्नई से सड़क मार्ग से यहां पहुंची शशिकला को कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर होसुर से 28 किलोमीटर दूर पराप्पना अग्रहारा स्थित केन्द्रीय कारागार भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण करने के लिए और दो सप्ताह की मोहलत देने और घर का खाना उपलब्ध कराने का उनका अनुरोध भी ठुकरा दिया। शशिकला के रिश्तेदार वीएन सुधाकरन और एलावारसी ने भी आत्मसमर्पण कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों की सजा भी बहाल कर दी थी। शशिकला उसी कार में आईं जिस कार का इस्तेमाल जयललिता किया करती थीं। उन्हें सख्त सुरक्षा के बीच कारागार ले जाया गया। जेल जाने से पहले शशिकला ने नया दांव खेल दिया। शशिकला ने अपने भतीजे दिनाकरन को एआईएडीएमके का उप महासचिव बनाया है। वह उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी की कमान संभालेंगे। जेल महानिदेशक सत्यनारायण राव ने बताया कि वह तीन साल और करीब 11 महीने जेल में रहेंगी। निचली अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई थी। इससे पहले सितंबर, 2014 में निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद शशिकला 21 दिन की सजा परप्पना अग्रहरा जेल में काट चुकी हैं। राव ने कहा कि शशिकला और एलावारसी इस जेल में महिलाओं के प्रखंड में एक छोटे प्रकोष्ठ में सजा काटेंगी। शशिकला को सामान्य भोजन मिलेगा न कि घर का बना भोजन, लेकिन वह डाक्टरों की सलाह के मुताबिक होगा। पुलिस ने कहा कि शशिकला का काफिला अदालत परिसर के पास पहुंचते ही उसमें शामिल चार कारों को नुकसान पहुंचाया गया। यह पता नहीं चल सका कि किन लोगों ने इन कारों को नुकसान पहुंचाया।

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