नई दिल्ली: चुनाव के समय ही संघ के लोग आरक्षण पर क्यों बोलते हैंः पासवान

नई दिल्ली: चुनाव के समय ही संघ के लोग आरक्षण पर क्यों बोलते हैंः पासवानचुनाव के समय ही संघ के लोग आरक्षण पर क्यों बोलते हैंः पासवान

नई दिल्ली : भाजपा के सहयोगी एवं केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने आरक्षण पर आरएसएस के प्रचार प्रमुख की विवादित टिप्पणी को परोक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए कहा है कि आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है और इसे कोई भी खत्म नहीं कर सकता। नरेन्द्र मोदी सरकार में सबसे प्रमुख दलित चेहरा, पासवान ने रविवार को कहा, आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है और इसे कोई समाप्त नहीं कर सकता। देश में आरक्षण बाबा साहब अंबेडकर एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बीच हुए पूना पैक्ट के तहत लागू किया गया थ। यह कोई खैरात नहीं है जिसे किसी की मर्जी से लागू किया जाए और समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इसमें किसी तरह का छेड़छाड़ की गयी या फिर कोई भी बदलाव किया जाएगा तो हमारी पार्टी संसद से लेकर सड़कों तक इसका पुरजोर विरोध करेगी। पासवान ने आश्चर्य जताया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता चुनाव के बेहद करीब ऐसे बयान क्यों देते हैं। उन्होंने कहा कि संघ के प्रवक्ता और अखिल-भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने हाल में आरक्षण पर जैसा बयान दिया है उससे लोगों में भ्रम पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, पिछली बार आरएसएस ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी ही टिप्पणी की थी और अब उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भी किया है। मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि चुनाव के दौरान ऐसी टिप्पणी क्यों की जाती है? केन्द्रीय मंत्री ने बताया, इसके कारण बिहार में हमें भारी नुकसान हुआ है। आरएसएस एक स्वतंत्र संगठन है और मुझे नहीं पता कि वह ऐसे बयान क्यों देता है। ऐसी टिप्पणियों से लोगों का भ्रमित होना स्वभाविक है। संघ के नेता मनमोहन वैद्य ने शुक्रवार को आरक्षण नीति की समीक्षा पर बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अंबेडकर भी इसे अनंतकाल तक जारी रखने के पक्ष में नहीं थे। यह टिप्पणी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को खासा नुकसान पहुंचा सकती है। जयपुर साहित्य महोत्सव में परिसंवाद सत्र के दौरान वैद्य ने कहा था, एससी-एसटी के लिए आरक्षण अलग संदर्भ में शुरू किया गया था। संविधान में इसे उनके साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के मरहम के रूप में रखा गया था। यह हमारी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा था, इसलिए, उनके लिए आरक्षण (संविधान) स्वीकार किए जाने के वक्त से है। लेकिन अंबेडकर ने भी कहा था कि इसे अनंतकाल तक जारी रखना अच्छा नहीं है। इसके लिए तय समयसीमा होनी चाहिए। आरक्षण नीति की समीक्षा से संबंधित आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की बिहार चुनाव से पहले की गयी टिप्पणी ने भाजपा को बहुत नुकसान पहुंचाया था। उस बयान ने बिहार के एससी-एसटी, पिछड़ा वर्ग और कमजोर तबके को नीतिश कुमार नीत महागठनबंधन की ओर मोड़ दिया था। अपने बयान में पासवान ने कहा, किसी की निजी राय से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। देश में जब तक जाति व्यवस्था रहेगी, तक तब आरक्षण लागू रहेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता लोजपा के दो मुख्य सिद्धांत हैं और वह सरकार को आरक्षण व्यवस्था के साथ छेड़खानी नहीं करने देगी जोकि संवैधानिक अधिकार है। पासवान ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक वह जिंदा हैं आरक्षण जारी रहेगा।

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