कविता इंद्रजीत महुआ भरत पुर की : पढ़े पूरी कविता

कविता इंद्रजीत महुआ भरत पुर की : पढ़े पूरी कविताकविता इंद्रजीत महुआ भरत पुर की : पढ़े पूरी कविता

मेरी गलतियां का ,

एहसास वो कुछ यूँ कराती है ....

जब भी करता हूँ गलती ,
वो कुछ पल को रुठ जाती है ....

कितना करती है मुझसे स्नेह,
वो मुझको प्यार से समझाती है....

हो जाता है प्रसन्न मेरा ह्रदय,
जब तकलीफों में भी मुस्कुराती है....

जब जब हुआ मैं फटेहाल सा
मेरी जेब में लक्ष्मी रख जाती है.....

कहती कष्ट बिना सुख नहीं मिलता
मेहनत का पियो जाम वो बताती है....

प्रेम की छाया वो मेरे सर पर करती
ग़मों की बरसात में भी मुझे हँसाती है....

गुंचे खिल उठते जब थामता हूँ मैं हाथ
शर्माकर पलकें झुकाकर वो लरजाती है...

दिल की रफ़्तार बड़ गई मेरे भी आज
उसकी याद मोहें दिल को बड़ा सताती है.....

#इन्द्र
#मेरी
& पत्नी

इंद्रजीत (महुआ) भरतपुर राज्यस्थान.......

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