मेरे इस जीवन पर सदा रहेगा जिंदगी भर तेरा यह भार : पढ़े पूरी कविता

मेरे इस जीवन पर सदा रहेगा जिंदगी भर तेरा यह भार : पढ़े पूरी कविता

मेरे इस जीवन पर सदा रहेगा जिंदगी भर तेरा यह भार
मेरे घर आँगन की चहकती चिरैया छोड़ चली घरपरिवार

रचाकर हाथ मेहँदी वाले जो चहक रही थी कल आँगन में
मैं श्रोता सा बन कर देख रहा था उसके सपनों का संसार

आज रिश्तें नातों से मुख मोड़ चली है वो परियों की रानी
बसाकर घर किसी संग वो करेगी अपने सपनों को साकार

मेरे ख़ुदा तू खुश रखना सदा उसको यह इल्तिज़ा करता हूँ


बहना हमारी छोड़ चली हमकोआज अपने साजन के द्वार

हो सके तो उसके हिस्से के गम मुझको दे देना तू मेरे मौला
सुना मैंने की दुनियां में तू हैं ही गम और ख़ुशी का ठेकेदार

सोचा ना था सांसे थमने लगेंगी मेरी जब विदा होगी मुझसे
बीतें हुए लम्हें मांग लेगी मुझसे मेरी बहना अपना उपहार

बड़ी कशमकश में हैं यह दिल मेरा रो रहा बातें याद करके

अश्कों के मोती बिखेर रही आज मेरी आँखो में है अश्रुधार

जिसकी ऊँगली पकड़कर चला हूँ बचपन से मैं छोड़ूँ कैसे
माँ का जन्म पिता की छाँव और बहना का दिल में है प्यार

देख तू मेरी इज्जत रखना देना उसको सारे जहाँ की ख़ुशी
उसकी जिंदगी में कर देना प्रकाश मेरे को देना तू अंधियार


प्रकाश भारती पुलिस सब इंपेक्टर उत्तर प्रदेश.........

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