ग़ज़ल- मोहब्बत करके पछताने लगे है' : पढ़े पूरी ग़ज़ल

ग़ज़ल- मोहब्बत करके पछताने लगे है : पढ़े पूरी ग़ज़लग़ज़ल- मोहब्बत करके पछताने लगे है' : पढ़े पूरी ग़ज़ल

हम मोहब्बत करके पछताने लगे है
उसकी याद मुझे अब सताने लगे है

जिसके साथ गुजरती थी मेरी हर शाम
अब वो ही मुझसे दूरी बनाने लगे है

न जाने वक़्त ने ये कैसा रुख मोड़ लिया
मेरे आंसू पोछते वाले मुझे रुलाने लगे है

मेरी एक आह पे गिरते थे जिनके आंसू
अब वो मेरे जख्म देखकर मुस्कुराने लगे है

क्या कुसूर था मेरा तुम मुझे बता तो देते

अब तेरा नाम लेकर सब मुझे जलाने लगे

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पियुष राज दुमका,झारखण्ड

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