कविता अशोक सपड़ा हमदर्द की

2018-03-01 16:54:12.0

कविता अशोक सपड़ा हमदर्द की

जी हाँ हम फ़ौजी आपके जीने का आधार है

कश्मीर से कन्याकुमारी महाराष्ट्र से बिहार है

हम केंद्र बिन्दु ठहरें हम ही सुरक्षा का पर्याय

हम भारत माँ का सौन्दर्य हम मां का श्रृंगार है

हम मेहनत कश मजदूर हम है कर्म योगी भी

हम मौर्यो का धाम हम मराठों से बनी दीवार है

हम में जाटों का जुनून हम ही गुर्जरों की शान

तो राज्यस्थान से गुजरात में लहराती तलवार है

हम ब्रज की होली हम महाराष्ट्र में बनती रंगोली

बिहार की छठ तो बंगाल में नवरात्रि का त्योहार है

हमें देख गन्ने के खेत बुलाते ,पंछी भी चन्ह्चाहते

हम पंछी के मधुर स्वर तो हम भारत के हथियार है

हम कवि की कविता हम प्रेमिका का सुंदर सपना

हम फौजी ठहरे हम भारत माँ के बेटे राजकुमार है

हम जेहादीयों के लिये तो आतंक का प्रर्याय ठहरें

हम तिरँगे में लिपटे आते हम भी किसी के संसार है

अशोक सपड़ा हमदर्द...........


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