प्रेम प्रेम प्रेम अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया : पढ़े पूरी कविता

2016-11-28 23:00:00.0

प्रेम प्रेम प्रेम अधूरे प्रेम की पूरी दुनिया : पढ़े पूरी कविता

मेरे साथी तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो मैं कर सकती हूं तुमसे अधूरा प्रेम क्योंकि बहुत कुछ घट जाने के बाद अधूरा हिस्सा ही बचा रह सकता है किसी के जीवन मे पर मैं अब करना भी नहीं चाहती पूरा प्रेम मैं जानती हूं वह प्रेम हो सकता है खतरनाक किसी भी स्त्री के लिए वह प्रेम बना सकता है किसी स्त्री को बहुत ही कमजोर मैं कर सकती हूं तुमसे अधूरा प्रेम क्योंकि मैं बचा लेना चाहती हूं खुद में एक पूरा संसार अपनी इच्छाओं और सपनों की संभावित दुनिया का एक प्रेम जो लील लेना चाहता है समूचे स्त्री जीवन को एक प्रेम जो नहीं मानता एक स्त्री का प्रेम रह सकता है जिंदा अपनी तमाम आकांक्षाओं के साथ एक प्रेम जो ले आता एक स्त्री को घर और उस घर की परिक्रमा करते करते वह सच में मानने लगती है कि वो समूची पृथ्वी की परिक्रमा कर रही है एक स्त्री सपनों में उड़ने के दृश्य नहीं वो देखने लगती है एक बच्चे के रोने का स्वप्न तब वह स्त्री करने लगती है पूरा प्रेम पर मैं करना चाहती हूं अधूरा प्रेम अपनी पूरी दुनिया के साथ।

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