पुलेला गोपीचंद : बैडमिंटन का 'द्रोणाचार्य', जिसने अपने शिष्यों को 'अर्जुन' बनाया

Hindi breaking news today live bharat ka ujala

नई दिल्ली: “जब मैं सन्यास लूंगा तब मैं बहुत खुशी महसूस करूंगा, मैं जो करना चाहता था, वह मैं कर चुका हूं. इन बच्चों के अंदर वह क़ाबलियत है कि वे आगे जाकर मेडल जीत सकते हैं. जब मेरा कोई तारीफ करता है तो मैं खुश होता हूं और जब मेरा कोई आलोचना करता है तो मैं उसे चुनौती के रूप में लेता हूं और अपने काम के जरिये जवाब देता हूं” कुछ साल पहले भारत के सबसे बेहतरीन बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद ने एक इंटरव्यू के दौरान यह कहा था. ऐसा लग रहा है कि गोपीचंद का सपना पूरा हो गया है.

पहले साइना, अब सिंधु ओलिंपिक में अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत की मान पूरी दुनिया में बढ़ाने में कामयाब रही हैं. 2012 लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन में भारत के लिए पहला पदक जीता था. अब पीवी सिंधु भी इतिहास रचने जा रही है. सिंधु रियो ओलिंपिक के फाइनल में पहुंच चुकी है. अगर आज सिंधु दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी स्पेन की कैरोलिना मरीन को हरा देती है तो गोल्डन गर्ल बनकर करोड़ों देशवासियों का सपना पूरा करेगी. अगर वह हार भी जाती है तो कम से कम उसे रजत पदक मिलेगा.

पी. गोपीचंद के चलते सिंधु और साइना ने छुआ कामयाबी का शिखर 
सिंधु और साइना की कामयाबी के पीछे सबसे ज्यादा योगदान गोपीचंद का रहा है. गोपीचंद द्रोणाचार्य बनकर अपने शिष्यों को 'अर्जुन' के तरह बनाया और पदक जताया. जब सिंधु रियो ओलिंपिक के फाइनल में पहुंची तब उसके पिता पीवी रम्मना का  कहना था कि सिर्फ गोपीचंद की वजह से सिंधु इस मुकाम तक पहुंच पाई है. कामयाबी के जिस शिखर पर गोपीचंद खुद नहीं पहुंच पाए, उस स्तर पर अपने शिष्यों को पहुंचाया. सिर्फ एक गुरू नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह भी उनका साथ दिया. एक पिता की तरह उनके के लिए क्या सही है या गलत है, समझाया.

 एक इंटरव्यू के दौरान गोपीचंद की पत्नी लक्ष्मी ने बताया था कि गोपीचंद कभी-कभी देर रात अपने टेनिस अकादमी पहुंच जाते थे, यह देखने के लिए कि उनके शिष्य सही सलामत है या नहीं. गोपीचंद ने जब अपनी टेनिस अकादमी शुरू की थी, तब उनका मुख्य मक़सद ओलंपिक में अपने शिष्यों को पदक जिताना था.

अकादमी खोलने के लिए गिरवी रख दिया था अपना घर
गोपीचंद ने जब अपना अकादमी शुरू की थी, तब कहा जा रहा था की यह सिस्टम उन्हें सफल होने नहीं देगा लेकिन गोपीचंद अपने दम पर अच्छे कोच साबित हुए. कड़ी मेहनत और लगन से अपने आपको कोच के रूप में शीर्ष पर पहुंचाया. अपनी अकादमी के लिए गोपीचंद को काफी संघर्ष करना पड़ा. आंध्रप्रदेश सरकार ने गोपीचंद को अकादमी बनाने के लिए ज़मीन तो दे दी थी लेकिन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए गोपीचंद के पास पैसे नहीं थे. उन्होंने अपना घर गिरवी रख दिया, फिर एक व्यापारी के मदद से अपना प्रोजेक्ट पूरा किया. जो सरकार और कॉर्पोरेट, मेडल जीतने के बाद खिलाड़ी के
साथ-साथ गोपीचंद की तारीफ करते हैं, वे अकादमी खोलने के लिए गोपीचंद को मदद करने के लिए तैयार नहीं थे.

गहने बेचकर खरीदा था बैडमिंटन रैकेट
गोपीचंद को एक अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा था. बैडमिंटन रैकेट खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं हुआ करते थे. उनको अपना पहला बैडमिंटन रैकेट खरीदने के लिए अपने घर के गहने बेचने पड़े थे. बार-बार घायल होने की वजह से भी गोपीचंद के अच्छा बैडमिंटन खिलाड़ी बनने का सपना कई बार टूटा. लेकिन गोपीचंद ने अपने ज़िंदगी में कभी हार नहीं मानी. मेहनत और निष्ठा से हर समस्या को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ा. गोपी ने अपने करियर में कई पदक जीते हैं. उनको अर्जुन अवार्ड से लेकर द्रोणाचार्य अवार्ड से भी नवजा जा चुका है.

और भी कई नामी खिलाड़ी दिए है गोपीचंद ने
सिर्फ साइना और सिंधु नहीं बल्कि भारत के कई और शानदार खिलाड़ी गोपीचंद के अकादमी के हिस्सा रहे हैं. श्रीकांत किदांबी,पी कश्यप, गुरुसाई दत्त, तरुण कोना जैसे बैडमिंटन खिलाड़ी गोपीचंद के शिष्य रहे हैं. गोपीचंद ने बचपन में सीखे आदर्श को अपने शिष्यों को हमेशा देने की कोशिश की. संघर्ष करते हुए कैसे आगे बढ़ा जाता है, वह सिखाया. गोपीचंद ने हमेशा फिटनेस पर ध्यान दिया और अपने शिष्यों को शीर्ष पर पहुंचे के लिए फिट रहने की सलाह दी.

  Similar Posts

Share it
Top