4G सेवा: जानिए अन्य टेलीकॉम कंपनियां क्यों लगा रही हैं रिलायंस जिओ पर धोखाधड़ी का आरोप

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नई दिल्ली: देश की 4G ब्रॉडबैंड नेटवर्क प्रदान करने जा रही रिलायंस जिओ और देश की अन्य टेलीकॉम कंपनियों के बीच टकराव तेज़ होता जा रहा है. रिलायंस जिओ का स्वामित्व भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी के पास है. हालांकि रिलायंस जिओ ने आधिकारिक तौर पर अभी तक अपनी सेवा लॉन्च नहीं की है. लेकिन पहले से ही 4G सेवा प्रदान करने वाली भारती एयरटेल और वोडाफोन का कहना है कि टेस्टिंग फेज़ के बहाने रिलायंस जिओ ग्राहकों को मुफ़्त डेटा और कॉलिंग सेवा प्रदान करके ग्राहक तोड़ रही है.

अन्य सेवाप्रदाता कंपनियों का तर्क है कि रिलायंस जिओ 4G एयरवेव का नि:शुल्क इस्तेमाल यह दावा करते हुए कर रही है कि यह "प्री-लॉन्च" मोड है. इससे अन्य टेलीकॉम कंपनियों के साथ-साथ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है जिसके वे हकदार हैं.

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जताई आपत्ति
टेलीकॉम सेक्टर का प्रमुख संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया या सीओएआई रिलायंस जिओ सहिए सभी प्रमुख सेवाप्रदाताओं को सदस्य मानता है. लेकिन हाल ही में इस संस्था ने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा कि रिलायंस "बीटा टेस्टिंग के नाम पर व्यावसायिक सेवाएं" नि:शुल्क देकर "ग्राहकों को लुभा" रही है.

संगठन के प्रमुख  राजन एस मैथ्यूज ने NDTV से कहा, "एक बहुत ही स्पर्धात्मक और आवेशित माहौल में, जब कोई खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा हो तो किसी को इस बात से हैरान नहीं होना चाहिए कि कुछ मुद्दों को तनाव है." उन्होंने आगे कहा, "परीक्षण और व्यावसायिक परिचालन का मुद्दा सही है."
 रिलायंस ने एजेंसी को कोर्ट में घसीटने की दी धमकी

उधर, रिलायंस ने संगठन की कार्यप्रणाली को "प्रतिस्पर्धी परिचालकों का प्रवक्ता" करार देते हुए पलटवार किया है. इतना ही नहीं रिलायंस ने एजेंसी को कोर्ट में घसीटने की भी धमकी दी है. रिलायंस और उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच टकराव की शुरुआत दो माह पहले हुई थी जब रिलायंस ने अन्य परिचालकों पर बेजोड़ कनेक्टिविटी के लिए पर्याप्त इंटरकनेक्ट पोर्ट न देने का आरोप लगाया था.

कंपनी का आरोप था कि इसके चलते रिलायंस जिओ के ग्राहक अन्य नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो पा रहे हैं. एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया आरोपों से इनकार किया है और कहा कि रिलायंस अपने सिग्नल स्ट्रेंथ के परीक्षण के बहाने एयरवेव का प्रयोग करते हुए पूर्ण सेवाओं की पेशकश कर रही थी.

और बढ़ सकती है कड़वाहट
हालांकि सरकार ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन दूरसंचार मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने NDTV को बताया कि सरकार किसी का पक्ष नहीं लेगी. सरकार चाहती है कि दूरसंचार नियामक यानी ट्राई इस विवाद को निपटाए. अगले माह सभी सेवाप्रदाता भारत में अभी तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम बोली में भाग लेंगे. ऐसे में इस लड़ाई के आगामी कुछ महीनों तक जारी रहने की पूरी संभावना है.

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